हिमाचल प्रदेश

छात्रा की अपील रंग लाई, ग्रामीणों ने बनाया लकड़ी का पुल

Kavita2
15 July 2026 12:20 PM IST
छात्रा की अपील रंग लाई, ग्रामीणों ने बनाया लकड़ी का पुल
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मंडी : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक छात्रा की भावुक अपील ने ग्रामीणों को ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। चिऊणी पंचायत के घ्यार गांव की 11वीं कक्षा की छात्रा कनिका ने बारिश के मौसम में स्कूल जाने में हो रही परेशानी को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में उसने प्रशासन से सुमोडा गाड नाले पर पुल बनाने की मांग की थी, ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच सकें।

कनिका ने अपने वीडियो में कहा था, “हम स्कूल जाना चाहते हैं, लेकिन बारिश की वजह से सुमोडा गाड नाला पार नहीं कर सकते। इस पर पुल नहीं बना है। प्रशासन से कई बार विनती की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। कृपया एक पुल बनाया जाए। ऐसे मौसम में छोटे बच्चे नाला पार कर कैसे स्कूल जाएंगे।”

छात्रा की यह अपील इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। हालांकि सरकारी स्तर पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन कनिका की परेशानी सुनकर स्थानीय ग्रामीणों का दिल पसीज गया। इसके बाद तीन गांवों के लोगों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया।

करीब 80 ग्रामीणों ने श्रमदान कर सुमोडा गाड नाले पर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर दिया। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों और मेहनत से पुल का निर्माण किया, ताकि बच्चों को बारिश के दिनों में स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़े।

ग्रामीणों के इस प्रयास से अब बच्चों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले बारिश के दौरान नाले में पानी का बहाव बढ़ने से बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता था। कई बार अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए खुद साथ जाना पड़ता था या फिर उन्हें छुट्टी करनी पड़ती थी।

लकड़ी का पुल बनने के बाद अब स्कूली बच्चे आसानी से नाला पार कर स्कूल पहुंच पा रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों के लिए भी यह पुल रोजमर्रा के कामों में मददगार साबित हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस स्थान पर स्थायी पुल की मांग की जा रही थी। उन्होंने कई बार प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद ही पहल करते हुए अस्थायी पुल बना दिया।

कनिका की अपील ने न केवल ग्रामीणों को एकजुट किया, बल्कि यह भी दिखाया कि स्थानीय लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह आगे आ सकते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि लकड़ी के अस्थायी पुल की जगह जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में यह इलाका जोखिम भरा हो जाता है और स्थायी व्यवस्था की जरूरत है।

ग्रामीणों के अनुसार, नाले पर पुल नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती थी। छोटे बच्चे बारिश और तेज बहाव के बीच नाला पार करने को मजबूर थे। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था।

इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब जब लोगों ने खुद श्रमदान कर पुल बना लिया है, तो उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही स्थायी पुल निर्माण की दिशा में कदम उठाएगा।

ग्रामीणों के इस प्रयास को सोशल मीडिया पर भी लोगों की सराहना मिल रही है। कई लोगों ने कहा कि एक छात्रा की छोटी सी पहल ने पूरे गांव को एकजुट कर दिया और लोगों ने मिलकर अपनी बड़ी समस्या का अस्थायी समाधान निकाल लिया।

फिलहाल लकड़ी के पुल से बच्चों और ग्रामीणों की आवाजाही शुरू हो गई है। लेकिन लोगों की मांग अब भी यही है कि सरकार जल्द से जल्द यहां मजबूत और सुरक्षित पुल का निर्माण कराए, ताकि हर मौसम में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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