हिमाचल प्रदेश

नए रूप में सजेगा श्री चामुंडा माता मंदिर का गर्भगृह, सोने-चांदी से होगा भव्य नवीकरण

Kavita2
27 Sept 2026 3:51 PM IST
नए रूप में सजेगा श्री चामुंडा माता मंदिर का गर्भगृह, सोने-चांदी से होगा भव्य नवीकरण
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री चामुंडा माता मंदिर का गर्भगृह इस साल के अंत तक नए स्वरूप में नजर आएगा। मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के नवीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए बड़े स्तर पर तैयारी शुरू की है। इस कार्य में सोने और चांदी का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने इसके लिए अनुमानित तीन किलो सोना और 2.85 क्विंटल चांदी इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। वहीं माता के गर्भगृह में कुल छह क्विंटल चांदी के इस्तेमाल की योजना बताई जा रही है।

मंदिर के गर्भगृह को भव्य रूप देने के लिए माता के भक्त भी आगे आए हैं। इस धार्मिक कार्य में सहयोग के लिए श्रद्धालुओं ने हामी भरी है। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी सोना-चांदी और अन्य कार्यों के लिए दान देने की इच्छा जताई है। भक्तों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से गर्भगृह के नवीकरण का कार्य पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

विशेष बात यह है कि मंदिर के नवीकरण में सहयोग करने वाले कई दानदाताओं ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की इच्छा जताई है। ये श्रद्धालु बिना किसी प्रचार के मंदिर के कार्य में योगदान दे रहे हैं। कुछ दानदाता सीधे तौर पर मंदिर के नवीकरण से जुड़े कार्य भी करवा रहे हैं। इससे मंदिर के सौंदर्यीकरण के काम को गति मिलने की उम्मीद है।

श्री चामुंडा माता मंदिर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के गर्भगृह का धार्मिक महत्व होने के कारण इसके नवीकरण को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। योजना है कि इस साल के अंत तक गर्भगृह का नया स्वरूप श्रद्धालुओं के सामने होगा।

गर्भगृह में सोने और चांदी के इस्तेमाल से इसकी भव्यता और बढ़ने की उम्मीद है। मंदिर प्रशासन की ओर से अनुमानित तीन किलो सोने के इस्तेमाल का फैसला लिया गया है। इसके साथ 2.85 क्विंटल चांदी का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। गर्भगृह में कुल छह क्विंटल चांदी के उपयोग की योजना है, जिसके लिए भक्तों की ओर से सहयोग किया जाएगा।

मंदिर के नवीकरण में श्रद्धालुओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक आस्था के कारण कई भक्त अपनी ओर से सहयोग करने के लिए आगे आए हैं। सामाजिक संस्थाओं ने भी मंदिर के इस कार्य में योगदान देने की इच्छा जताई है। इस तरह मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं के सहयोग से गर्भगृह को नया स्वरूप देने की तैयारी है।

कांगड़ा स्थित श्री चामुंडा माता मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। बाण गंगा के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन इतिहास के कारण विशेष पहचान रखता है। मंदिर मां दुर्गा के उग्र स्वरूप चामुंडा को समर्पित है। माता के इस स्वरूप को लेकर प्राचीन धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

मान्यता के अनुसार मां दुर्गा के उग्र रूप ने चंड और मुंड नाम के राक्षसों का संहार किया था। इसके बाद कौशिकी ने देवी को ‘चामुंडा’ नाम से विभूषित किया। इसी धार्मिक मान्यता के कारण माता का यह स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।

बाण गंगा के तट पर स्थित होने के कारण मंदिर का प्राकृतिक परिवेश भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। धार्मिक महत्व के साथ यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। करीब चार शताब्दी पुराने इस मंदिर में समय-समय पर आवश्यक नवीकरण और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य किए जाते रहे हैं। अब गर्भगृह को सोने और चांदी से नया रूप देने की योजना बनाई गई है।

मंदिर प्रशासन का प्रयास है कि गर्भगृह की धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए इसे नया स्वरूप दिया जाए। इसके लिए इस्तेमाल होने वाले सोने और चांदी की व्यवस्था में श्रद्धालुओं का सहयोग लिया जा रहा है। माता के भक्तों की ओर से इस कार्य के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

दान देने वाले कई श्रद्धालुओं ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का निर्णय लिया है। वे धार्मिक भावना के साथ इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालुओं ने नवीकरण के अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी भी ली है। सामाजिक संस्थाओं की ओर से भी सहयोग मिलने के कारण मंदिर के प्रस्तावित कार्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

गर्भगृह का नया स्वरूप तैयार होने के बाद मंदिर की भव्यता और बढ़ जाएगी। सोने और चांदी से होने वाला कार्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर के गर्भगृह का नवीकरण और धार्मिक स्वरूप को और सुंदर बनाना है।

श्री चामुंडा माता मंदिर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में मंदिर के गर्भगृह के नवीकरण की योजना को लेकर भक्तों में उत्साह है। श्रद्धालु स्वयं आगे आकर सोना, चांदी और नवीकरण कार्य में सहयोग करने की इच्छा जता रहे हैं।

करीब 400 साल पुराने इस सिद्धपीठ के गर्भगृह को साल के अंत तक नया रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर प्रशासन, श्रद्धालुओं और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से काम आगे बढ़ाया जा रहा है। नवीकरण पूरा होने के बाद श्री चामुंडा माता मंदिर का गर्भगृह सोने-चांदी की भव्य सजावट के साथ नए स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने होगा।

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