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चुनाव हारते ही EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है विपक्ष, अनुराग ठाकुर ने SIR का किया समर्थन

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां जब चुनाव जीतती हैं, तब उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और भारत के चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन चुनाव में हार मिलने के बाद वही दल इन संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। ठाकुर ने मतदाता सूची में सुधार के लिए चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का भी समर्थन किया।
हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि समारोह के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अनुराग ठाकुर ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम अपने पक्ष में नहीं आने पर विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे चुनावी व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया।
चुनाव में हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप
अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने और हारने के बाद उनके रुख में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्षी पार्टियों को चुनाव में सफलता मिलती है, तब वे चुनाव आयोग और ईवीएम की व्यवस्था को स्वीकार करती हैं।
लेकिन जब चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आते, तब वही राजनीतिक दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगते हैं।
ठाकुर ने इस रवैये की आलोचना करते हुए संवैधानिक संस्थाओं को लेकर विपक्ष की राजनीति पर सवाल खड़े किए। उनके बयान का मुख्य केंद्र चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष द्वारा उठाई जा रही आपत्तियां रहीं।
हालांकि, ये अनुराग ठाकुर के राजनीतिक आरोप हैं। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन का किया बचाव
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में सुधार के लिए चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का समर्थन किया।
एसआईआर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जाती है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना तथा नियमों के अनुसार अपात्र, दोहराए गए या अन्य त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड की पहचान करना है।
चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। वहीं अनुराग ठाकुर ने इसका बचाव करते हुए विपक्ष की आलोचना की।
उनका कहना था कि विपक्षी दल चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर अपने राजनीतिक हितों के अनुसार रुख अपनाते हैं।
EVM को लेकर विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल
अनुराग ठाकुर ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर विपक्षी दल ईवीएम के जरिए आए परिणामों को स्वीकार कर लेते हैं।
लेकिन हारने के बाद उन्हीं मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।
भारत में चुनावों के दौरान ईवीएम का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से इसकी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
ठाकुर ने अपने बयान में विपक्ष की इसी आलोचना को निशाने पर रखा।
हालांकि, किसी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना और उसमें वास्तविक अनियमितता साबित होना अलग-अलग बातें हैं। चुनाव संबंधी आरोपों का आकलन संबंधित साक्ष्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक बहस
भारत का चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मतदाता सूची तैयार करना, उसका पुनरीक्षण करना और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करना आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
इसी व्यवस्था के तहत समय-समय पर मतदाता सूचियों में संशोधन किया जाता है, ताकि चुनावी रिकॉर्ड को अद्यतन रखा जा सके।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर चल रही बहस में मतदाता सूची की शुद्धता के साथ पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है।
विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां उठा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने आयोग की कार्रवाई का समर्थन किया है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद के बावजूद मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने का प्रश्न चुनावी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि समारोह के दौरान दिया बयान
अनुराग ठाकुर ने रविवार को हिमाचल प्रदेश में आयोजित नवरात्रि समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत की।
इसी दौरान उनसे चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और विपक्ष के विरोध को लेकर सवाल किए गए।
उन्होंने अपने जवाब में विपक्षी पार्टियों के चुनावी रवैये की आलोचना की और एसआईआर का बचाव किया।
नवरात्रि समारोह के दौरान दिया गया उनका बयान चुनावी व्यवस्था को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में समारोह के सटीक स्थान और ठाकुर की पूरी बातचीत का विवरण नहीं दिया गया है।
मतदाता सूची में सुधार क्यों महत्वपूर्ण?
किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव में मतदाता सूची की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी सूची के आधार पर पात्र नागरिक मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं।
मतदाता सूची में गलत विवरण, दोहराए गए नाम या पात्र मतदाताओं के नाम छूटने जैसी समस्याएं चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण की जांच और निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
हालांकि, ऐसी किसी भी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि पात्र मतदाताओं के नाम बिना उचित आधार और निर्धारित प्रक्रिया के न हटाए जाएं।
इसी विषय को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।
विपक्ष पर हमलावर दिखे अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर के रविवार के बयान में चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर विपक्ष के रवैये की आलोचना प्रमुख रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी जीत के समय संवैधानिक संस्थाओं को स्वीकार करते हैं, लेकिन हारने पर उन्हीं संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगते हैं।
साथ ही उन्होंने एसआईआर का समर्थन करते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाए।
फिलहाल एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। अनुराग ठाकुर के बयान ने इस मुद्दे पर भाजपा का पक्ष एक बार फिर सामने रखा है।





