हिमाचल प्रदेश

मकान से मवेशियों तक, सरकार देगी सहायता

Saba Naaz
27 July 2026 2:29 PM IST
मकान से मवेशियों तक, सरकार देगी सहायता
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की बोह घाटी में बादल फटने से प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास का बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह तबाह हो गए हैं, उन्हें दोबारा घर बनाने के लिए सरकार की ओर से 7.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा घरेलू सामान, भूमि, पशुधन और फसल नुकसान के लिए भी सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने शाहपुर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली बोह घाटी में पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में सभी एजेंसियां मिलकर प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने में जुटी हुई हैं।

बोह घाटी में बादल फटने के बाद कई परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावितों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके पुनर्वास के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास अब रहने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें जरूरत के अनुसार सरकारी भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि वे अपना नया आशियाना बना सकें।

मुख्यमंत्री ने आपदा में मारे गए पशुओं के लिए भी मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस की मौत हुई है, उन्हें प्रति पशु 55 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं बकरियों की मौत पर प्रति बकरी 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा जिन घरों में आपदा का पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख रुपये तक की राहत राशि प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रभावित दुकानदारों को भी सरकार सहायता देगी। नुकसान के आकलन के आधार पर क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। किसानों को फसल नुकसान के लिए पांच हजार रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराये के मकानों में रहना पड़ रहा है, उन्हें सरकार की ओर से हर महीने पांच हजार रुपये किराया सहायता के रूप में दिया जाएगा। साथ ही प्रभावित परिवारों को छह महीने तक निशुल्क राशन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।

राहत कार्यों के तहत प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये और 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता राशि जारी की जा चुकी है। इसके अलावा प्रभावित लोगों के राजस्व प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार करने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। अब तक 13 राजस्व प्रमाणपत्र तैयार किए जा चुके हैं और लोगों को बोनाफाइड प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं।

आपदा में कई लोगों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज भी प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे दस्तावेज दोबारा बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि बच्चों और युवाओं को आगे की पढ़ाई या अन्य कार्यों में परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने रिड़कमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे आसपास के ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित करने का काम भी जारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाए। इसी के तहत स्पैड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है।

बोह घाटी में सेना और अन्य राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की मदद कर रहे हैं। सेना के जवान मलबे में दबे सामान को निकालने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हुए हैं। सरकार ने कहा है कि आपदा प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी और पुनर्वास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा।

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