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हिमाचल प्रदेश
पारंपरिक ज्ञान के साथ तकनीक का समन्वय भारत को बनाएगा वैश्विक नेता: Bansal
Payal
2 May 2026 1:49 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: भारतीय शिक्षा और नवाचार जगत में एक नई सोच को बल देते हुए, एक वरिष्ठ विश्वविद्यालय प्रमुख और VC बंसल ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और आधुनिक तकनीक का संगम ही भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करेगा। उनका मानना है कि देश की सांस्कृतिक धरोहर और विज्ञान का सही मिश्रण वैश्विक मंच पर भारत की पहचान मजबूत कर सकता है। VC बंसल ने यह बात एक शैक्षणिक सम्मेलन और नवाचार कार्यशाला में कही, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि भारतीय समाज में प्राचीन ज्ञान की बड़ी संपदा है, जो आयुर्वेद, कृषि, खगोल विज्ञान, योग और स्थापत्य कला जैसी विविधताओं में मौजूद है।
अगर इसे तकनीकी नवाचार के साथ जोड़ दिया जाए, तो यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बना सकता है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस बदलते परिवेश में हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को तकनीक के साथ जोड़ना ही सफलता की कुंजी है। इससे न केवल भारतीय युवाओं को अवसर मिलेंगे, बल्कि देश की शोध और विकास क्षमताएँ भी बढ़ेंगी।” VC बंसल ने उदाहरण देते हुए कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में पारंपरिक ज्ञान और तकनीकी नवाचार के मेल से वास्तविक और टिकाऊ समाधान सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा विज्ञान के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रस्तुत किया जा सकता है।
श्रोताओं को संबोधित करते हुए VC बंसल ने कहा कि यह सिर्फ शैक्षणिक दृष्टिकोण नहीं बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा भी है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से अपील की कि वे पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के प्रयास करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत करेगा। VC बंसल ने आगे कहा कि पारंपरिक ज्ञान और तकनीक के मेल से न केवल शोध और नवाचार में वृद्धि होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। कार्यक्रम में छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भी इस दृष्टिकोण पर चर्चा की। कई ने कहा कि यह विचार युवाओं को प्राचीन ज्ञान को समझने और उसे आधुनिक समस्याओं के समाधान में लागू करने के लिए प्रेरित करेगा। VC बंसल के अनुसार, यह संगम भारतीय संस्कृति की विशिष्टता को बनाए रखते हुए तकनीकी दक्षता के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की राह खोलता है। यह सिर्फ एक शैक्षणिक पहल नहीं बल्कि राष्ट्र की लंबी अवधि की रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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