हिमाचल प्रदेश

7 नवंबर को सुक्खू कैबिनेट की बैठक संभव, बड़े फैसलों की उम्मीद

Kavita2
4 Nov 2026 4:54 PM IST
7 नवंबर को सुक्खू कैबिनेट की बैठक संभव, बड़े फैसलों की उम्मीद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दीपावली से पहले राज्य सरकार एक बार फिर महत्वपूर्ण फैसले लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में सात नवंबर को राज्य सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित बैठक में विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने, बजट घोषणाओं को लागू करने और समाज के अलग-अलग वर्गों को राहत देने से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक की तारीख और अंतिम एजेंडे की औपचारिक पुष्टि अभी बाकी है।

दीपावली से ठीक पहले संभावित इस बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कई प्रस्ताव विचाराधीन हैं। ऐसे में संभावना है कि कैबिनेट की अगली बैठक में महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रशासनिक मामलों पर निर्णय लिए जाएं।

जानकारी के अनुसार, सात नवंबर को शनिवार होने के कारण मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करने पर चर्चा चल रही है। हालांकि, अगले दिन दीपावली का त्योहार होने की वजह से बैठक के कार्यक्रम में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। सरकार की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही बैठक की तारीख और समय स्पष्ट हो सकेगा।

राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ता लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। हालांकि, प्रदेश सरकार सरकारी कर्मचारियों और पात्र पेंशनरों के लिए पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी की घोषणा पहले ही कर चुकी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 23 अक्टूबर को इसका ऐलान किया था। इसके बाद सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के आदेश भी जारी किए गए।

ऐसे में सात नवंबर की संभावित बैठक में पांच प्रतिशत डीए की नई घोषणा होने की बात सही नहीं होगी। अलबत्ता कर्मचारियों और पेंशनरों से संबंधित अन्य लंबित वित्तीय मुद्दों, विभिन्न निगमों की देनदारियों या प्रशासनिक प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है।

प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से डीए बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस फैसले से बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ मिलने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान के बकाया एरियर में से दस हजार रुपये देने की घोषणा भी की गई थी।

राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों के कर्मचारियों तथा पेंशनरों की कुछ मांगें अलग से लंबित हैं। विशेष रूप से हिमाचल पथ परिवहन निगम के पेंशनरों ने महंगाई भत्ते और बकाया वित्तीय लाभों को लेकर अपनी मांग उठाई है। इन मामलों में संबंधित विभागों और निगम प्रबंधन के स्तर पर चर्चा जारी है। हालांकि, इन प्रस्तावों को सात नवंबर की बैठक के एजेंडे में शामिल किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रस्तावित कैबिनेट बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण विषय सरकारी विभागों में भर्ती से जुड़ा हो सकता है। प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने और लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग उठती रही है। सरकार भी अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

अक्टूबर में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में पद सृजित करने और भरने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इनमें जल शक्ति विभाग, शिक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े पद शामिल थे। अब अगली बैठक में कुछ और विभागीय प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना जताई जा रही है।

शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता आम जनता से सीधे जुड़ा मुद्दा है। स्कूलों में शिक्षकों और अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी दूर करने से सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में संभावित भर्ती प्रस्तावों को लेकर युवाओं की निगाहें सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।

बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने से संबंधित मामले भी मंत्रिमंडल के समक्ष आ सकते हैं। राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं। इनमें से कुछ योजनाओं के लिए विभागीय स्तर पर कार्यवाही जारी है। जिन प्रस्तावों को मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक है, उन्हें आगामी बैठकों में प्रस्तुत किया जा सकता है।

प्रदेश सरकार के सामने एक ओर कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय राहत देने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना भी जरूरी है। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और बढ़ती देनदारियों के बीच सरकार को नए फैसलों में बजट उपलब्धता का ध्यान रखना पड़ता है।

मंत्रिमंडल की संभावित बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर से शुरू होना प्रस्तावित है। धर्मशाला के तपोवन में आयोजित होने वाला यह सत्र 21 नवंबर तक चलेगा। इसके लिए छह बैठकें निर्धारित की गई हैं।

शीतकालीन सत्र से पहले होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में विधानसभा में पेश किए जाने वाले विधेयकों, विभागीय प्रस्तावों और अन्य प्रशासनिक मामलों पर चर्चा संभव है। सरकार को सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का भी सामना करना होगा। ऐसे में मंत्रिमंडल के स्तर पर महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की जा सकती है।

दीपावली के त्योहार को देखते हुए आम जनता को भी सरकार से राहत भरे फैसलों की उम्मीद है। सामाजिक कल्याण योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और अन्य विभागीय प्रस्तावों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं। हालांकि, किसी नई योजना या आर्थिक सहायता की घोषणा को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

राज्य सरकार दिसंबर में अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे करने जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की समीक्षा भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकती है।

फिलहाल प्रदेश के कर्मचारियों, पेंशनरों, बेरोजगार युवाओं और आम नागरिकों की नजर सात नवंबर को प्रस्तावित मंत्रिमंडल बैठक पर है। बैठक की तारीख तय होने और आधिकारिक एजेंडा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी।

दीपावली से पहले सरकार का अगला कदम क्या होगा, यह मंत्रिमंडल की बैठक और उसमें लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल संभावित बैठक को लेकर तैयारियों और चर्चाओं का दौर जारी है।

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