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हिमाचल विधानसभा में राष्ट्रगान को लेकर टकराव, विपक्ष ने मांगी पूरी वीडियो फुटेज

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई। विपक्ष ने सरकार और मुख्यमंत्री पर मामले को लेकर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रगान के दौरान सदन की गरिमा और नियमों का पूरी तरह पालन किया गया था। विवाद राष्ट्रगान समाप्त होने के बाद विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी बात रखने के प्रयास को लेकर पैदा हुआ।
विपक्ष के नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सदन में राष्ट्रगान के समय की पूरी वीडियो फुटेज सार्वजनिक रूप से दिखाई जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। विपक्ष का कहना है कि वीडियो फुटेज सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि राष्ट्रगान के दौरान किसी सदस्य ने किसी तरह का अनादर किया था या नहीं।
राष्ट्रगान के बाद ही बात रखने का दावा
विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि विधानसभा सत्र की शुरुआत में सदन की नियमावली और गरिमा के अनुरूप सभी सदस्य राष्ट्रगान के दौरान खड़े हुए और उसमें शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रगान पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी बात रखने का प्रयास किया गया।
जयराम ठाकुर के अनुसार, विपक्ष की इस बात को सत्ता पक्ष की ओर से दुर्भावनापूर्ण तरीके से राष्ट्रगान के कथित अपमान से जोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखा जाना चाहिए और तथ्यों के आधार पर ही कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि सदन में मौजूद कैमरों की रिकॉर्डिंग पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट कर सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी के बजाय वीडियो फुटेज को सामने रखना अधिक उचित होगा।
विधानसभा अध्यक्ष से वीडियो दिखाने की मांग
विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि सदन में लगी स्क्रीन पर राष्ट्रगान के समय की पूरी रिकॉर्डिंग दिखाई जाए। उनका तर्क है कि इससे सदन के सभी सदस्यों और जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रगान देश के सम्मान और संवैधानिक गरिमा से जुड़ा विषय है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी प्रकार का भ्रम या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप उचित नहीं है। यदि किसी सदस्य के आचरण को लेकर सवाल उठे हैं तो उसका फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
सत्ता पक्ष पर भ्रामक प्रचार का आरोप
विपक्ष ने मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष पर इस मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष ने राष्ट्रगान के दौरान सदन की मर्यादा का पालन किया था। इसके बावजूद घटना को अलग रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर सामने रखनी चाहिए। उनका दावा है कि राष्ट्रगान के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी बात रखने का प्रयास करना राष्ट्रगान के अपमान के बराबर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का अपना महत्व है और इनके संबंध में किसी भी चर्चा को तथ्यों और संवैधानिक मर्यादा के भीतर रखा जाना चाहिए।
मानसून सत्र के दूसरे दिन गरमाया मामला
मानसून सत्र के दूसरे दिन यह मुद्दा सदन के भीतर और बाहर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया। राष्ट्रगान के कथित अपमान का मुद्दा सामने आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
विपक्ष ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी सदस्य राष्ट्रगान के समय खड़े थे। इसके बाद ही राष्ट्रीय गीत से संबंधित विषय को उठाया गया। विपक्ष के मुताबिक, पूरे मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग ही सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि फुटेज को सदन के सामने लाकर स्थिति साफ की जाए, जिससे किसी प्रकार की गलतफहमी की गुंजाइश न रहे।
संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से बचने की अपील
विपक्ष ने कहा कि राष्ट्रगान का विषय बेहद संवेदनशील है और इससे जुड़े किसी भी मामले को राजनीतिक विवाद में बदलने के बजाय तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। नेताओं ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
विपक्ष का कहना है कि यदि किसी सदस्य के आचरण पर सवाल है तो विधानसभा के नियमों के अनुसार इसकी जांच की जा सकती है। लेकिन बिना पूरी घटना सामने आए आरोप लगाना उचित नहीं है।
जयराम ठाकुर ने दोहराया कि विपक्ष ने राष्ट्रगान पूरा होने के बाद ही अपनी बात रखने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि सदन की रिकॉर्डिंग सामने आने से विवाद की वास्तविकता स्वत: स्पष्ट हो जाएगी।
वीडियो फुटेज से साफ हो सकती है तस्वीर
पूरे विवाद के बीच अब विधानसभा की वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विपक्ष की मांग महत्वपूर्ण हो गई है। विपक्ष चाहता है कि राष्ट्रगान शुरू होने से लेकर उसके समाप्त होने और उसके बाद हुई गतिविधियों की पूरी फुटेज सामने रखी जाए।
यदि फुटेज सार्वजनिक या सदन के सामने प्रस्तुत की जाती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि राष्ट्रगान के दौरान सदस्यों का आचरण कैसा था और विवाद किस घटना के बाद शुरू हुआ।
फिलहाल मानसून सत्र में यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान का नया कारण बन गया है। विपक्ष अपने रुख पर कायम है और उसने विधानसभा अध्यक्ष से पूरी वीडियो फुटेज दिखाने की मांग दोहराई है। वहीं, मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।





