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हिमाचल प्रदेश
मंत्री का दावा, स्मार्ट सिटी ने Dharamshala को कंक्रीट का जंगल बना दिया
Ratna Netam
10 May 2026 7:50 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने हाल ही में चेतावनी दी है कि स्मार्ट सिटी योजना के चलते धर्मशाला धीरे-धीरे ‘कंक्रीट के जंगल’ में बदलती जा रही है। मंत्री ने कहा कि शहर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य और बेतरतीब शहरीकरण ने प्राकृतिक हरियाली और पर्यावरण संतुलन को प्रभावित किया है।
मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमारे पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए मशहूर धर्मशाला अब कंक्रीट के ढेर और भारी निर्माणों से भरा हुआ है। स्मार्ट सिटी के नाम पर हो रहे विकास कार्यों ने शहर की मूल पहचान और हरियाली को नुकसान पहुँचाया है।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर पर्यावरण-मित्र नीतियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो शहर का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी मंत्री की बातों का समर्थन किया। कई ने बताया कि शहर में हरियाली कम हो रही है और पेड़ों की कटाई बढ़ गई है। “स्मार्ट सिटी योजना के तहत नई बिल्डिंग्स, रोड्स और वाणिज्यिक क्षेत्र तेजी से बन रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता भी कम हो रही है,” एक स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा।
धर्मशाला के पर्यटन उद्योग पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पर्यटक शहर की प्राकृतिक सुंदरता देखने आते हैं और अब वहां बड़े-बड़े कंक्रीट ब्लॉक्स का विस्तार उन्हें निराश कर रहा है।
मंत्री ने प्रशासन से अपील की है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत निर्माण कार्यों में पर्यावरण संरक्षण के उपाय लागू किए जाएँ। उन्होंने जोर दिया कि हरियाली बचाने, पेड़ लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन को बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएँ।
स्मार्ट सिटी अधिकारियों ने कहा कि परियोजना में आधुनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत थी, लेकिन पर्यावरण और हरियाली को ध्यान में रखकर विकास करने की भी पूरी कोशिश की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में ग्रीन बेल्ट क्षेत्र और सार्वजनिक पार्कों का विस्तार किया जाएगा।
हालांकि, मंत्री और स्थानीय जनता का कहना है कि अब समय आ गया है कि विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच संतुलन बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। उनका मानना है कि यदि तुरंत ध्यान नहीं दिया गया तो धर्मशाला की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की पहचान दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।
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