हिमाचल प्रदेश

हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था को झटका, पैदावार में बड़ी गिरावट

nidhi
4 Oct 2026 6:59 AM IST
हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था को झटका, पैदावार में बड़ी गिरावट
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हिमाचल में सेब उत्पादन को बड़ा झटका

शिमला: हिमाचल प्रदेश की करीब 5000 करोड़ रुपये की सेब आर्थिकी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य में इस बार सेब की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक उत्पादन 2.58 करोड़ पेटियों से घटकर करीब 1.17 करोड़ पेटियों तक सिमट गया है। यानी पिछले स्तर की तुलना में उत्पादन आधे से भी कम रह गया। इससे हजारों बागवानों के साथ सेब कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।

हिमाचल प्रदेश में सेब केवल एक फल नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी और अन्य सेब उत्पादक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार पर निर्भर हैं। बागवानी से लेकर पैकिंग, परिवहन, भंडारण और मंडियों तक एक बड़ा आर्थिक तंत्र सेब के उत्पादन से जुड़ा हुआ है। उत्पादन में आई भारी कमी का सीधा असर बागवानों की आमदनी पर पड़ने की आशंका है। जिन बागवानों ने खाद, दवाओं, मजदूरी, पैकेजिंग और बगीचों के रखरखाव पर बड़ी रकम खर्च की है, उनके लिए कम फसल लागत निकालने की चुनौती बढ़ा सकती है। उत्पादन घटने से मंडियों में पहुंचने वाले सेब की मात्रा भी प्रभावित होती है।
सेब की खेती मौसम पर काफी हद तक निर्भर करती है। सर्दियों में पर्याप्त ठंड, सही समय पर बारिश और फूल आने के दौरान अनुकूल तापमान अच्छी फसल के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मौसम में बदलाव, असमय बारिश, ओलावृष्टि, तापमान में उतार-चढ़ाव और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियां सेब की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
सेब उत्पादन घटने का प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्टर, आढ़ती, पैकेजिंग उद्योग, कोल्ड स्टोरेज संचालक और मजदूर भी इससे प्रभावित होते हैं। हिमाचल में सेब सीजन के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। फसल कम होने से इस पूरे कारोबार में आर्थिक गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं।
करीब 5000 करोड़ रुपये की सेब आर्थिकी को देखते हुए उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट चिंता का विषय है। बागवान लंबे समय से उत्पादन लागत बढ़ने, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में उचित कीमत जैसे मुद्दों का सामना कर रहे हैं। अब कम पैदावार ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। भविष्य में सेब उत्पादन को स्थिर रखने के लिए बदलती जलवायु के अनुरूप किस्मों, आधुनिक बागवानी तकनीक, सिंचाई व्यवस्था और मौसम आधारित सलाह पर जोर देना महत्वपूर्ण होगा। बागवानों को नई तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से जोड़ने से मौसम संबंधी जोखिमों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन का 2.58 करोड़ पेटियों से घटकर 1.17 करोड़ पेटियों पर आना बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ा संकेत है। यदि उत्पादन में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बागवानों को राहत देने के साथ सेब उद्योग को दीर्घकालिक चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी होगा।
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