- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- शिमला SP आवास खर्च...
शिमला SP आवास खर्च मामला: 14 लाख की मरम्मत पर विजिलेंस जांच की तैयारी

शिमला। पुलिस अधीक्षक (एसपी) शिमला के सरकारी आवास ‘साउथवुड’ की मरम्मत और रखरखाव पर हुए 14.07 लाख रुपये के खर्च को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) से जांच करवाने की सिफारिश की है।
मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शिमला की रिपोर्ट में सरकारी धन के कथित अनियमित उपयोग की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसपी संजीव कुमार गांधी सहित इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
जानकारी के अनुसार, एसपी शिमला के सरकारी आवास साउथवुड में मरम्मत और रखरखाव के नाम पर खर्च की गई राशि को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस मुख्यालय ने पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
एसएसपी शिमला की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में खर्च की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अनियमितताओं की आशंका व्यक्त की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि मरम्मत कार्यों के लिए अपनाई गई प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि खर्च की गई राशि का सही उपयोग हुआ या नहीं।
विजिलेंस जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। इसके अलावा मरम्मत कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड, बिल, भुगतान संबंधी दस्तावेज और स्वीकृतियों की भी जांच की जाएगी।
मामले में तत्कालीन एसपी संजीव कुमार गांधी की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया होती है। किसी भी सरकारी भवन पर खर्च करने से पहले स्वीकृति, बजट प्रावधान और कार्य की आवश्यकता का आकलन किया जाता है। ऐसे में इस मामले में भी इन्हीं पहलुओं की जांच की जाएगी।
पुलिस विभाग में सरकारी धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से उठाए गए कदम को सरकारी खर्चों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि साउथवुड आवास की मरम्मत में खर्च की गई राशि में कोई वित्तीय अनियमितता हुई थी या नहीं। जांच एजेंसी सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से मामले पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
सरकारी धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य केवल जिम्मेदारी तय करना नहीं, बल्कि भविष्य में वित्तीय प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाना भी होता है।
शिमला एसपी आवास साउथवुड मरम्मत मामले में अब सबकी नजर विजिलेंस जांच पर है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि खर्च में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या यह केवल प्रक्रिया संबंधी मामला था।





