हिमाचल प्रदेश

Shimla: छात्रा के साथ भेदभाव का मामला, एससी आयोग ने लिया संज्ञान

Admindelhi1
28 July 2026 7:31 PM IST
Shimla: छात्रा के साथ भेदभाव का मामला, एससी आयोग ने लिया संज्ञान
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छात्रा मामले में एससी आयोग ने अधिकारियों से मांगा ब्यौरा

शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने शिमला जिला के चियोग स्कूल में दलित छात्रा के हाथों से बना या परोसा गया भोजन नहीं खाने के कथित मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब करने का फैसला किया है। आयोग ने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार को शिमला में आयोजित बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े मामलों में जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन आयोग की आंख और कान की तरह काम करते हैं। किसी भी तरह के अत्याचार या भेदभाव की सूचना मिलने पर आयोग तुरंत कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि छुआछूत सामाजिक अभिशाप है और इसे रोकने के लिए सख्त कानून बने हैं। कानूनों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि रोहड़ू में 12 वर्षीय बच्चे की आत्महत्या के मामले में आयोग ने मौके पर जाकर जांच की थी। जांच के दौरान जातिगत भेदभाव सामने आने पर लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी को निलंबित किया गया था। उन्होंने सैंज की उस घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें अनुसूचित जाति समुदाय की एक महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या का आरोप था। उन्होंने कहा कि शुरुआती पुलिस जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना गया था, लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और जांच में कोताही बरतने वाले पुलिस जांच दल के सदस्यों को निलंबित किया गया। उनके अनुसार अब मामले की जांच सही दिशा में चल रही है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा। साथ ही जिला प्रशासन को जिले के सभी अंबेडकर भवनों की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में आयोग के सदस्य डॉ. विजय डोगरा ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आवंटित बजट का वास्तविक उपयोग किस प्रकार हो रहा है, इसका भी आयोग आकलन करता है। विभिन्न संगठनों से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाता है।

इस दौरान आयोग ने 'भीम पत्र' भी जारी किया। इसमें भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों तथा उनसे जुड़े प्रमुख संवैधानिक प्रावधानों की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। इसमें अनुच्छेद 15, 16, 46, 330, 332 और 338 सहित शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की भूमिका का उल्लेख किया गया है। आयोग ने बताया कि आगे एक और पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार की अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

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