हिमाचल प्रदेश

Shimla 200 साल पुराने बरगद के प्लेटफॉर्म पर NGT सख्त

Kiran
14 Aug 2026 12:51 PM IST
Shimla 200 साल पुराने बरगद के प्लेटफॉर्म पर NGT सख्त
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Shimla शिमला 200 साल पुराने बरगद के प्लेटफॉर्म पर NGT सख्त, पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश के जवाली तहसील क्षेत्र में स्थित करीब 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के आसपास बनाए गए प्लेटफॉर्म को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस मामले में NGT ने पेड़ की प्राकृतिक स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने सवाल उठाया है कि पुराने और विरासत महत्व वाले पेड़ों के आसपास किए गए निर्माण कार्य कहीं उनकी सेहत और विकास को प्रभावित तो नहीं कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, बरगद का यह पेड़ स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके आसपास लोगों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म का निर्माण किया गया था। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों के तने और जड़ों के आसपास पक्का निर्माण होने से पेड़ के प्राकृतिक विकास पर असर पड़ सकता है।

NGT ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित विभागों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। ट्रिब्यूनल यह जानना चाहता है कि प्लेटफॉर्म का निर्माण किस अनुमति के आधार पर किया गया और क्या इसके लिए पर्यावरणीय नियमों का पालन किया गया था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण से पेड़ की जड़ों, मिट्टी और आसपास के पर्यावरण को कोई नुकसान तो नहीं पहुंच रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बरगद जैसे विशाल पेड़ कई जीव-जंतुओं को आश्रय देते हैं और वातावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं। ऐसे में इनके आसपास किसी भी तरह का स्थायी निर्माण करने से पहले वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगद का यह पेड़ क्षेत्र की पहचान से जुड़ा हुआ है और इसकी सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। हालांकि, लोगों की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म को लेकर अब पर्यावरणीय नियमों के तहत समीक्षा की जा रही है। NGT ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच कर उचित रिपोर्ट पेश की जाए। ट्रिब्यूनल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे। पुराने पेड़ों की सुरक्षा को लेकर NGT पहले भी कई मामलों में सख्त निर्देश जारी कर चुका है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तय की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस फैसले को पुराने और विरासत महत्व वाले पेड़ों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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