हिमाचल प्रदेश

शिमला, मंडी और धर्मशाला बने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट

Kiran
12 Oct 2026 3:05 PM IST
शिमला, मंडी और धर्मशाला बने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट
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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश में साइबर क्राइम एक बढ़ता हुआ खतरा बन गया है। शिमला, मंडी और धर्मशाला में सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं और यहीं के लोग सबसे ज़्यादा इसका शिकार हुए हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक शिमला, मंडी और धर्मशाला के तीन रेंज-लेवल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों में साइबर क्राइम के 48 मामले दर्ज किए गए हैं। शिमला में सबसे ज़्यादा 19 मामले दर्ज हुए हैं, इसके बाद मंडी (15) और धर्मशाला (14) का नंबर आता है। पुलिस अधीक्षक (साइबर क्राइम) अमित यादव का कहना है कि साइबर क्राइम की ज़्यादातर शिकायतें इन्हीं तीन इलाकों से मिल रही हैं। वे बताते हैं कि राज्य में सामने आए मामलों में शिमला (12), कांगड़ा (10) और मंडी (9) के पीड़ितों की संख्या भी काफी ज़्यादा है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इन तरीकों में AI से बने फ़िशिंग ईमेल और मैसेज, ज़्यादा मुनाफ़े का वादा करने वाले फ़र्ज़ी इन्वेस्टमेंट प्लेटफ़ॉर्म, नौकरी और घर से काम (वर्क-फ़्रॉम-होम) के फ़र्ज़ी ऑफ़र, WhatsApp और Telegram के ज़रिए स्कैम, UPI और QR-कोड धोखाधड़ी, OTP चोरी, अकाउंट हैक करना और सोशल मीडिया पर किसी और का रूप धरकर धोखाधड़ी करना शामिल है।
यादव कहते हैं कि राज्य पुलिस ने इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए खास साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और साइबर सेल बनाए हैं। शिक्षण संस्थानों और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए साइबर क्राइम के नए तरीकों के बारे में लगातार सलाह (एडवाइज़री) जारी की जा रही है। पुलिस ने लोगों से सावधान रहने और किसी के साथ भी OTP, PIN या पासवर्ड शेयर न करने की अपील की है। नागरिकों को यह भी सलाह दी गई है कि वे किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच कर लें और बिना पुष्टि किए तुरंत पेमेंट करने की मांग का जवाब न दें।
अन्य सावधानियों में टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करना, मज़बूत और अनोखे पासवर्ड का इस्तेमाल करना, डिवाइस और सॉफ़्टवेयर को अपडेट रखना और पैसों के लेन-देन के लिए पब्लिक वाई-फ़ाई का इस्तेमाल न करना शामिल है। पुलिस का कहना है कि समय पर रिपोर्ट करने से और ज़्यादा पैसों के नुकसान को रोका जा सकता है। जो लोग साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और बिना देरी किए घटना की रिपोर्ट करें। जैसे-जैसे साइबर अपराधी ज़्यादा एडवांस्ड डिजिटल टूल और सोशल-इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, पुलिस ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के असर को कम करने के लिए जागरूकता और तुरंत रिपोर्ट करना बहुत ज़रूरी है।
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