हिमाचल प्रदेश

Shimla: हिमाचल की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान, कारीगरों को मिला जीआई प्रमाण-पत्र

Admindelhi1
27 Aug 2026 2:31 PM IST
Shimla: हिमाचल की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान, कारीगरों को मिला जीआई प्रमाण-पत्र
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हिमाचल के पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षण और पहचान, कारीगरों को जीआई प्रमाण-पत्र

शिमला: हिमाचल प्रदेश के तीन पारंपरिक उत्पादों रणसिंघा, लकड़ी की नक्काशी और हस्तनिर्मित कालीनों को हाल ही में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। इन उत्पादों से जुड़े कारीगरों ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से भेंट की। जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा स्थानीय उत्पादक समूहों, कारीगर समूहों तथा अन्य संबंधित हितधारकों के सहयोग से पूर्ण करवाई गई।

इस अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने नाबार्ड के अधिकारियों के माध्यम से अचारी (एएसीएचआरआई) फाउंडेशन कुल्लू के मनीष भारती एवं महेश भारती, कालीन कारीगर शकुंतला देवी, एसएवीएम संस्था मंडी के हीरा मणि, रणसिंघा कारीगर प्रदीप कुमार तथा लकड़ी की नक्काशी के कारीगर कृष्ण लाल को जीआई प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि जीआई टैग हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की विशिष्ट पहचान और प्रमाणिकता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की पहचान मजबूत होगी तथा इनसे जुड़े कारीगरों और समुदायों को उनके हुनर के लिए बेहतर पहचान के साथ-साथ अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

राज्यपाल ने पारंपरिक उत्पादों को जीआई मान्यता दिलवाने में स्थानीय उत्पादक एवं कारीगर समूहों को सहयोग प्रदान करने के लिए नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों और पारंपरिक कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने में भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने गुणवत्ता में सुधार, बेहतर ब्रांडिंग, आधुनिक विपणन, ई-कॉमर्स तथा व्यापक बाजार संपर्क के माध्यम से हिमाचली उत्पादों को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि प्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प कला देश-विदेश के उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।

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