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Shimla: पद्मश्री से सम्मानित हुए हिमाचल के डॉ. गौतम

शिमला: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम लाल गौतम ने प्रदेश का मान बढ़ाया है। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची में हिमाचल प्रदेश से एकमात्र नाम डॉ. प्रेम लाल गौतम का शामिल होना राज्य के लिए गर्व की बात है। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें डॉ. गौतम को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए प्रयोगों और उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।
12 दिसंबर 1947 को जन्मे डॉ. प्रेम लाल गौतम ने कृषि क्षेत्र में शिक्षा और शोध के माध्यम से देश को नई दिशा दी है। उन्होंने वर्ष 1968 में सोलन स्थित कृषि महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से 1970 में जेनेटिक्स में एमएससी और 1974 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका पूरा जीवन कृषि विज्ञान, पादप प्रजनन और जैव विविधता के संरक्षण को समर्पित रहा है।
डॉ. गौतम ने अपने सेवा जीवन की शुरुआत 16 सितंबर 1974 को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में की। इसके बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर, फसल अनुसंधान केंद्र के एसोसिएट डायरेक्टर और रानीचौरी स्थित हिल कैंपस के संयुक्त निदेशक और एसोसिएट डीन जैसे अहम दायित्व निभाए। देश स्तर पर भी वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वे पौध किस्म संरक्षण और कृषक अधिकार प्राधिकरण, नई दिल्ली के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, चेन्नई के अध्यक्ष रहे, जहां उन्होंने भारत सरकार के सचिव स्तर के पद पर कार्य किया।
डॉ. गौतम ने जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, आईसीएआर में उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), राष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी परियोजना के राष्ट्रीय निदेशक और राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। हिमाचल प्रदेश में वे डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन में वानिकी महाविद्यालय के डीन रहे। वर्तमान में वे बिहार के पूसा स्थित राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और हमीरपुर स्थित करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर भी हैं।
डॉ. प्रेम लाल गौतम एक जेनेटिसिस्ट और पादप प्रजनक हैं। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में गेहूं, कंगनी, सोयाबीन, राजमाश, चौलाई और कुट्टू सहित विभिन्न फसलों की 12 उन्नत किस्में विकसित की गईं। उन्होंने धान की दो जर्मप्लाज्म किस्मों के पंजीकरण में भी अहम भूमिका निभाई। बासमती चावल को लेकर राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नई परिभाषा तय करने में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने भारत में पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को नई दिशा दी। जैव विविधता कानून और पौध किस्म संरक्षण एवं कृषक अधिकार कानून के मसौदे और उनके क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने भारत का पक्ष मजबूती से रखा और एफएओ तथा संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर किसानों के अधिकारों और जैव सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया।





