हिमाचल प्रदेश

Shimla: शिमला में वीआईपी परमिट पर हाईकोर्ट की नाराजगी

Admindelhi1
11 Sept 2026 12:05 PM IST
Shimla: शिमला में वीआईपी परमिट पर हाईकोर्ट की नाराजगी
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सील सड़कों पर वीआईपी आवाजाही से कोर्ट नाराज

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला की सील और प्रतिबंधित सड़कों पर वीआईपी वाहनों की आवाजाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि प्रतिबंधित सड़कों पर वाहनों की संख्या कम की जानी चाहिए और इन मार्गों के परमिट का वास्तविक लाभ वहां रहने वाले स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। अदालत ने पाया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भी वाहन परमिट जारी किए गए हैं, जो संबंधित इलाकों में रहते ही नहीं हैं और शहर के दूर-दराज क्षेत्रों में निवास करते हैं।

मुख्य न्यायाधीश जी. एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बी. सी. नेगी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी संभव भसीन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के विशेष सचिव, गृह की ओर से अदालत में हलफनामा पेश किया गया। इसमें शिमला के एक प्रतिबंधित मार्ग पर जारी वाहन परमिटों की सूची भी दी गई।

सरकार के हलफनामे के अनुसार शेलेट डे स्कूल से शिल्ली चौक होते हुए छोटा शिमला तक के सील मार्ग के लिए 318 पुराने परमिटों का नवीनीकरण किया गया है, जबकि 44 नए परमिट जारी किए गए हैं। यह मार्ग शिमला रोड यूजर्स एंड पेडेस्ट्रियन (पब्लिक सेफ्टी एंड कन्वीनियंस) एक्ट, 2007 के तहत एस-1 श्रेणी का पूरी तरह सील मार्ग है। इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है और निर्धारित नियमों के तहत ही वाहनों को अनुमति दी जाती है।

अदालत ने परमिटों की सूची पर गौर करते हुए पाया कि इसमें बड़ी संख्या ऐसे वीआईपी और रसूखदार लोगों की है, जो संबंधित सील मार्ग के आसपास नहीं रहते। अदालत ने कहा कि वीआईपी संस्कृति के कारण उन स्थानीय आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए, जिनके घरों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता यही सील सड़क है।

खंडपीठ ने कहा कि स्थानीय निवासियों को उनके वाहनों के लिए बिना किसी अनावश्यक रुकावट के पास मिलना चाहिए, जिससे वे अपने घरों तक आसानी से पहुंच सकें। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि प्रतिबंधित मार्गों पर उपलब्ध सीमित वाहन आवाजाही की सुविधा का इस्तेमाल उन लोगों के लिए होना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

अदालत ने सरकार के हलफनामे पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस प्रतिबंधित मार्ग पर पहले कुल कितने परमिट जारी किए गए थे। पुराने और मौजूदा परमिटों की संख्या की तुलना के बिना यह आकलन करना मुश्किल है कि वाहनों की संख्या में वास्तव में कितनी कमी आई है।

प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को आश्वासन दिया गया कि सील मार्ग पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और परमिट व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। अदालत ने सरकार को इस संबंध में नई कसरत करने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।

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