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Shimla : भारी बारिश का कहर, संजौली के बोथवेल में भूस्खलन से कई मकानों पर खतरा

शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। शनिवार तड़के संजौली कॉलेज के समीप बोथवेल क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। भूस्खलन के कारण कई रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब तीन से चार इमारतें खतरे की जद में हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
भूस्खलन की घटना शनिवार सुबह करीब चार बजे हुई। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया और मलबा नीचे स्थित रिहायशी क्षेत्र की ओर आ गिरा। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
डंगा ढहने से रिहायशी क्षेत्र में पहुंचा मलबा
जानकारी के अनुसार, संजौली कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर बना एक डंगा भारी बारिश के कारण कमजोर होकर ढह गया। डंगा गिरने के बाद भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर स्थित मकानों और रास्ते तक पहुंच गया।
इससे कई घरों को खतरा पैदा हो गया है। वहीं, मकानों तक पहुंचने वाला रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी सूचना दी गई। स्थानीय स्तर पर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।
रिझाना में भी भूस्खलन, मलबे में दबी गाड़ियां
शिमला के रिझाना क्षेत्र में भी भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ। यहां मलबे की चपेट में आने से कई वाहन दब गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी कमजोर हो गई है, जिसके कारण जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। लोगों को सतर्क रहने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
बोथवेल क्षेत्र में भूस्खलन की यह पहली घटना नहीं है। इसी स्थान पर 28 जून 2025 को भी भीषण भूस्खलन हुआ था। उस समय पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सीधे रिहायशी मकानों में जा गिरी थीं।
उस घटना में कई बच्चे और महिलाएं अपने घरों के अंदर फंस गए थे। काफी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया था। उस हादसे के बाद भी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण यहां रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
भारी बारिश से बढ़ा खतरा
शिमला और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण जमीन खिसकने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान मिट्टी में नमी बढ़ जाती है, जिससे ढलानों के कमजोर होने का खतरा रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अनियोजित निर्माण और प्राकृतिक ढलानों में बदलाव भी भूस्खलन के खतरे को बढ़ा सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में समय-समय पर सुरक्षा जांच और उचित जल निकासी व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
प्रशासन ने शुरू किया निरीक्षण
भूस्खलन की सूचना के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। प्रभावित मकानों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। यदि किसी मकान को खतरा पाया जाता है तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में विशेषज्ञों की टीम भेजकर जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत इंतजाम किए जाएं।
लोगों में भय का माहौल
भूस्खलन की घटना के बाद बोथवेल क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान वे लगातार खतरे के साए में रहते हैं। कई परिवारों को चिंता है कि कहीं अचानक मलबा उनके घरों तक न पहुंच जाए।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। शिमला में लगातार हो रही बारिश के बीच लोगों से सावधानी बरतने और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की गई है।





