हिमाचल प्रदेश

Shimla: सरकार ने CSR खर्च पर कड़ा रुख अपनाया

Admindelhi1
29 Aug 2025 4:49 PM IST
Shimla: सरकार ने CSR खर्च पर कड़ा रुख अपनाया
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शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान मल्टीनेशनल व सीमेंट कंपनियों द्वारा प्रदेश से बाहर खर्च किए जा रहे कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड का मुद्दा गूंजा। इस पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सीमेंट कंपनियां अपने सीएसआर फंड का इस्तेमाल हिमाचल प्रदेश में ही करें और इसमें स्थानीय विधायकों व लोगों की प्राथमिकताओं को भी शामिल किया जाएगा।

अर्की से कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी ने प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र अर्की में अल्ट्राटेक और अंबुजा सीमेंट कंपनियां स्थापित हैं। यहां लोग लंबे समय से पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन इन कंपनियों का सीएसआर फंड स्थानीय जनता की भलाई में खर्च नहीं हो रहा है। उन्होंने मांग की कि सीएसआर फंड के उपयोग में प्रभावित लोगों और स्थानीय विधायकों को भी शामिल किया जाए।

इस पर जवाब देते हुए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्वीकार किया कि यह सच है कि मल्टीनेशनल कंपनियां हिमाचल की बजाय अन्य राज्यों में अपना सीएसआर फंड खर्च कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्षों में अर्की क्षेत्र में अंबुजा कंपनी ने अब तक 5.38 करोड़ रुपये और अल्ट्राटेक ने 93.97 लाख रुपये सीएसआर में खर्च किए हैं, लेकिन इनकी प्राथमिकता स्थानीय आवश्यकताओं की बजाय अन्य क्षेत्रों पर रही है। मंत्री ने कहा कि कंपनियों को अनिवार्य रूप से अपने शु़द्व लाभ का न्यूनतम दो प्रतिशत सीएसआर पर खर्च करना होता है, लेकिन अधिकांश कंपनियां इसका पालन नहीं करतीं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रही है तो इसकी लिखित शिकायत मिले, सरकार निश्चित तौर पर जांच कर कार्रवाई करेगी। अल्ट्राटेक और अंबुजा सीमेंट की भी चेकिंग करवाई जाएगी।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने माना कि सीमेंट कंपनियां रात में धूल छोड़ती हैं जिससे आसपास के क्षेत्रों में लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि बिलासपुर और दाड़लाघाट स्थित सीमेंट कंपनियां भी अपने सीएसआर फंड का सही इस्तेमाल नहीं कर रही हैं।

दून से विधायक राम कुमार ने भी इस मुद्दे पर अनुपूरक सवाल उठाया और कहा कि सीएसआर फंड का इस्तेमाल वहीं होना चाहिए जहां कंपनियां स्थापित हैं। इसी तरह बिलासपुर सदर से विधायक त्रिलोक जमवाल ने भी कि उनके क्षेत्र में स्थित सीमेंट कंपनी भी सीएसआर का पैसा कहीं और खर्च कर रही है जबकि स्थानीय लोग प्रदूषण और धूल से प्रभावित हैं।

उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरे मुद्दे को लेकर गंभीर है और अब कंपनियों को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे हिमाचल प्रदेश में ही सीएसआर फंड का इस्तेमाल करें। साथ ही जिला प्रशासन को यह भी आदेश दिए जाएंगे कि इस फंड के खर्च में स्थानीय विधायकों की राय को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमेंट और खनन करने वाली कंपनियां अगर लापरवाही करेंगी तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

इससे पहले संजय अवस्थी के मूल सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री ने बताया कि बीते दो वर्षों में 1 अप्रैल 2023 से 20 फीसदी 2025 तक प्रदेश में अवैध खनन के 21182 मामले पकड़े गए हैं और दोषियों के विरूद्व 13.95 करोड़ का जुर्माना वसूला गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीते 2 सालों में प्रदेश में मुख्य व लघू खनिजों की रॉयल्टी दरों में कोई बढ़ौतरी नहीं की है।

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