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शिमला: देशभर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न कर्मचारी फेडरेशनों द्वारा गुरूवार को किए गए हड़ताल के आह्वान का असर हिमाचल प्रदेश में भी दिखाई दिया। प्रदेश के कई जिलों में मजदूर, किसान और कर्मचारी संगठनों ने सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के बैनर तले जिला मुख्यालय, ब्लॉक और तहसील स्तर पर रैलियां निकालकर केंद्र सरकार के चार नए लेबर कोड का विरोध किया और इन्हें वापस लेने की मांग उठाई।
हड़ताल के कारण बैंकिंग, एलआईसी, बिजली और कुछ अन्य सेवाओं पर भी आंशिक असर देखने को मिला। विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी, 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मी, ट्रीटमेंट प्लांट कर्मचारी, बिजली परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी, रेहड़ी-फड़ी और तहबाजारी यूनियन से जुड़े लोग, होटल कर्मी, निर्माण मजदूर, मनरेगा मजदूर, उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी, मिड-डे मील वर्कर तथा कई सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए। प्रदेश के लगभग 15 हजार से अधिक बिजली इंजीनियर और कर्मचारी दिनभर पेन-डाउन और टूल-डाउन हड़ताल पर रहे।
राजधानी शिमला में सीटू के बैनर तले मजदूर, किसान, छात्र और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने पंचायत भवन से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखीं। रैली में शामिल संगठनों का कहना था कि नए लेबर कोड श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं और इनके लागू होने से नौकरी की सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने ठेका प्रथा और सरकारी संस्थानों के निजीकरण का भी विरोध किया।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि चार लेबर कोड लागू होने से श्रमिकों के कई पुराने अधिकार कमजोर होने की आशंका है। उनका कहना था कि लंबे समय के संघर्ष के बाद बने कई श्रम कानूनों को समाप्त या समाहित कर दिया गया है जिससे मजदूरों की कार्य स्थितियां कठिन हो सकती हैं और काम के घंटे बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नए प्रावधानों के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो सकते हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
रैली में आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। नेताओं ने कहा कि इन कर्मचारियों को नियमित करने, बेहतर वेतन देने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में पहले किए गए वादों को अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। उन्होंने मनरेगा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों को नियमित काम उपलब्ध कराने की मांग की।
ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि देशभर में मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनें संयुक्त रूप से आंदोलन कर रही हैं और इसी क्रम में यह हड़ताल आयोजित की गई है। उनका कहना था कि यदि श्रमिक संगठनों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।





