हिमाचल प्रदेश

Shimla: प्री-स्कूल में बच्चे के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार

Payal
23 April 2026 7:39 PM IST
Shimla: प्री-स्कूल में बच्चे के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: शिमला के एक प्री-स्कूल में एक बच्चे को allegedly थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है, जिससे माता-पिता और स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी का माहौल है। घटना स्कूल के नियमित समय के दौरान हुई, जब बच्चा कक्षा में मौजूद था। माता-पिता ने बताया कि उन्हें यह खबर सुनकर काफी झटका लगा और उन्होंने स्कूल प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की। एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने भेजते हैं।
किसी भी बच्चे के साथ इस तरह का व्यवहार बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।” स्कूल प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “हम इस घटना पर गहरा खेद व्यक्त करते हैं और सुनिश्चित करेंगे कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो। जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय अधिकारियों और बाल कल्याण समिति को भी इस मामले की जानकारी दी गई है। समिति ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की घटनाओं की दोबारा पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी स्कूलों में निगरानी बढ़ाई जाएगी।
बाल विकास विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस उम्र के बच्चों पर शारीरिक प्रताड़ना का लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि बच्चों के व्यवहार सुधार के लिए सकारात्मक और सहायक तरीकों का प्रयोग करें।
इस घटना के बाद कई माता-पिता ने स्कूलों में स्टाफ प्रशिक्षण और निगरानी के कड़े नियम लागू करने की मांग की। उन्होंने शिक्षा विभाग से भी अनुरोध किया कि सभी निजी और सरकारी प्री-स्कूलों में नियमित निरीक्षण किया जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने समाज में बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में अनुशासन के तरीके पर व्यापक बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को केवल शिक्षा देने के स्थान के रूप में नहीं बल्कि बच्चों के सुरक्षित और संवेदनशील विकास के केंद्र के रूप में देखना चाहिए।
स्कूल ने यह भी कहा कि घटना में शामिल बच्चे को मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाएगी और सभी कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
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