हिमाचल प्रदेश

Shimla: बजट सत्र सरकार के लिए मुश्किल: जयराम ठाकुर

Admindelhi1
18 March 2026 12:57 PM IST
Shimla: बजट सत्र सरकार के लिए मुश्किल: जयराम ठाकुर
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"सदन में जवाबदेही तय होगी"

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से एक दिन पहले ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह सत्र सत्ता पक्ष के लिए आसान नहीं रहने वाला है और सरकार को सदन में हर सवाल का जवाब देना होगा।

शिमला में मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष ने प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर नोटिस दिए हैं, जिनमें कानून व्यवस्था, विकास कार्यों में कमी और आर्थिक स्थिति जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है और वह लगातार सदन को गुमराह कर रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बार परंपराओं के विपरीत राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को लंबित रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि सरकार खुद असमंजस की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रही है और सरकार इस पर स्पष्टता देने से बच रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं और वित्तीय संकट गहराता जा रहा है। साथ ही कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष इन सभी मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाएगी और सरकार को जवाब देना ही होगा।

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनके बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला माना जाना चाहिए और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर पैसे वसूलने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिससे आम जनता परेशान है।

उद्योगों के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि प्रदेश से उद्योगों का पलायन जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बावजूद कई संस्थानों के बंद होने का सिलसिला थमा नहीं है, जो चिंता का विषय है।

जयराम ठाकुर ने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर करने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार क्या छिपाना चाहती है। उन्होंने याद दिलाया कि सूचना का अधिकार अधिनियम पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा लागू किया गया था और यह पारदर्शिता का एक अहम माध्यम है।

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