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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में अब जल्द ही बंगाल टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी मिनी जू में 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रविवार को बंगाल टाइगर का नर और मादा जोड़ा पहुंच गया।
महाराष्ट्र के नागपुर जिले स्थित गोरेवाडा वन्यजीव केंद्र से लाए गए इस बाघ जोड़े के आगमन के साथ ही श्रीरेणुकाजी मिनी जू में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
1900 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे बाघ
जानकारी के अनुसार, बंगाल टाइगर का यह जोड़ा शुक्रवार शाम करीब 6 बजे नागपुर के गोरेवाडा से रवाना हुआ था।
वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम बाघों को लेकर हिमाचल के लिए रवाना हुई थी।
करीब 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने के बाद रविवार दोपहर को दोनों टाइगर सुरक्षित रूप से श्रीरेणुकाजी पहुंचे।
खुले ट्रक में किए गए विशेष इंतजाम
टाइगर शेड्यूल-वन श्रेणी के वन्यजीवों में शामिल हैं। ऐसे में इनके स्थानांतरण के दौरान नेशनल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया।
बाघों के लिए विशेष रूप से तैयार खुले ट्रक में यात्रा की व्यवस्था की गई थी। सफर के दौरान उनके भोजन, पानी और स्वास्थ्य निगरानी के लिए विशेष प्रबंध किए गए।
वन विभाग की टीम पूरे रास्ते बाघों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखती रही।
कई राज्यों से होकर पहुंचा काफिला
बाघों को लेकर निकला काफिला महाराष्ट्र से रवाना होकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा होते हुए हिमाचल प्रदेश पहुंचा।
लंबे सफर के बावजूद वन विभाग की टीम ने सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को प्राथमिकता दी।
श्रीरेणुकाजी पहुंचने के बाद अब बाघों को उनके नए बाड़े में रखा गया है, जहां उन्हें नए वातावरण के अनुकूल होने का समय दिया जाएगा।
श्रीरेणुकाजी मिनी जू के लिए बड़ी उपलब्धि
बंगाल टाइगर का आगमन श्रीरेणुकाजी मिनी जू के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से यहां बाघों को लाने की योजना पर काम चल रहा था।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलेगा और क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
संरक्षण और जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा
बंगाल टाइगर भारत के प्रमुख वन्यजीवों में शामिल है। इनके संरक्षण को लेकर देशभर में कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
श्रीरेणुकाजी में टाइगर जोड़े की मौजूदगी से लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चिड़ियाघर और मिनी जू केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण, अध्ययन और शिक्षा के केंद्र भी होते हैं।
स्वास्थ्य जांच के बाद आगे की प्रक्रिया
वन विभाग की टीम अब दोनों टाइगर की निगरानी कर रही है। नए वातावरण में उनके व्यवहार और स्वास्थ्य की लगातार जांच की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, बाघों को सुरक्षित और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
पर्यटकों में बढ़ेगा आकर्षण
श्रीरेणुकाजी क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। अब यहां बंगाल टाइगर का जोड़ा आने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
वन विभाग को उम्मीद है कि यह पहल क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को नई दिशा देगी।
12 वर्षों के इंतजार के बाद हिमाचल के सिरमौर जिले में बंगाल टाइगर का आगमन वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बड़ी खबर है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि टाइगर जोड़ा नए माहौल में किस तरह ढलता है।





