हिमाचल प्रदेश

Shimla में सड़क धंसने से बढ़ा खतरा

Kiran
4 Sept 2026 12:33 PM IST
Shimla में सड़क धंसने से बढ़ा खतरा
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Shimla शिमला में सड़क धंसने से बढ़ा खतरा
शिमला के पंथाघाटी इलाके में बुधवार रात ढल्ली-टूटीकंडी सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस जाने से आसपास रहने वाले लोगों और इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सड़क के साथ बना फुटपाथ भी प्रभावित हुआ है। सड़क का हिस्सा धंसने के बाद पत्थर और कंक्रीट का मलबा नीचे की ओर गिरा, जिससे सड़क के नीचे स्थित इमारतों और वहां चल रहे निर्माण कार्य को खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क और फुटपाथ के धंसने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि सड़क का और हिस्सा नीचे की ओर खिसकता है या ऊपर से मलबा गिरता है, तो इससे आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। सड़क के नीचे एक इमारत का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सड़क और फुटपाथ धंसने के बाद पत्थर और कंक्रीट का मलबा नीचे गिर रहा है। लोगों को आशंका है कि यदि मलबा लगातार नीचे गिरता रहा तो वह नजदीकी इमारत से टकराकर नुकसान पहुंचा सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मौके का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है।
पंथाघाटी में सड़क धंसने की यह घटना पहली बार नहीं है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, पिछले साल भी इसी सड़क का एक अन्य हिस्सा धंस गया था। लगातार सड़क के अलग-अलग हिस्सों में धंसाव होने से सड़क की मजबूती और इसके आसपास हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से किसी तरह का बड़ा हादसा न हो।
शिमला जैसे पहाड़ी शहर में सड़क धंसने की घटनाएं विशेष चिंता का विषय होती हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़कें ढलानों पर बनी होती हैं और भारी बारिश के दौरान मिट्टी तथा चट्टानों की पकड़ कमजोर हो सकती है। इससे भूस्खलन, सड़क धंसने और मलबा गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क के आसपास होने वाले निर्माण कार्य और जल निकासी व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।
शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने सड़क के नीचे चल रहे निर्माण कार्य का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान इस तरह के निर्माण कार्यों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, बारिश के मौसम में जमीन पहले से ही नमी के कारण कमजोर हो सकती है और ऐसे समय में निर्माण गतिविधियों से ढलान पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, सड़क धंसने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाने की जरूरत है कि धंसाव का कारण भारी बारिश, जल निकासी की समस्या, मिट्टी का कटाव, निर्माण कार्य या इनमें से कई कारणों का संयुक्त प्रभाव है। इसके लिए तकनीकी जांच और मौके का विस्तृत निरीक्षण आवश्यक होगा। लोक निर्माण विभाग यानी PWD के एक अधिकारी ने कहा है कि विभाग की टीम मौके का दौरा करेगी। अधिकारियों का उद्देश्य सड़क के इस हिस्से के बार-बार धंसने के कारणों का पता लगाना है। निरीक्षण के बाद सड़क की स्थिति, आसपास की जमीन और निर्माण गतिविधियों का आकलन किया जा सकता है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और मरम्मत से जुड़े कदम तय किए जाएंगे।
फिलहाल स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की है। सड़क के नीचे और आसपास स्थित इमारतों में रहने वाले लोगों को डर है कि यदि सड़क का धंसाव बढ़ा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सड़क की नींव, ढलान और जल निकासी व्यवस्था की भी जांच करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और रखरखाव के दौरान ढलान की स्थिरता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। सड़क के नीचे या आसपास निर्माण कार्य होने पर जमीन पर पड़ने वाले दबाव और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है। यदि पानी जमीन के भीतर जमा होता है या ढलान से सही तरीके से बाहर नहीं निकलता, तो मिट्टी की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
पंथाघाटी की घटना ने एक बार फिर शिमला में मानसून के दौरान सड़क सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों की निगरानी का मुद्दा सामने ला दिया है। पिछले साल भी इसी सड़क के एक हिस्से के धंसने और अब दोबारा ऐसी घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। अब PWD के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क बार-बार क्यों धंस रही है और इसे सुरक्षित बनाने के लिए किस तरह के तकनीकी उपायों की आवश्यकता है। फिलहाल प्रशासन के सामने प्राथमिकता सड़क के प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करना, आसपास की इमारतों को संभावित नुकसान से बचाना और धंसाव के कारणों की जल्द पहचान करना है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
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