हिमाचल प्रदेश

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में SMC का पुनर्गठन, नई जिम्मेदारियों के साथ लागू होंगी नई गाइडलाइन

Kavita2
17 Jun 2026 11:30 AM IST
हिमाचल के सरकारी स्कूलों में SMC का पुनर्गठन, नई जिम्मेदारियों के साथ लागू होंगी नई गाइडलाइन
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Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों (School Management Committee) का गठन अब नए सिरे से किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार इन समितियों की संरचना और जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्कूलों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सामुदायिक भागीदारी आधारित बनाना है।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य परियोजना निदेशक Rajesh Sharma ने इस संबंध में प्रदेश के सभी उपनिदेशकों (उच्च एवं प्रारंभिक शिक्षा) तथा उपनिदेशकों (गुणवत्ता) को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि एसएमसी का गठन अब नए नियमों और मानकों के आधार पर किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत एसएमसी को केवल प्रशासनिक भूमिका तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें स्कूल विकास और संसाधन प्रबंधन में भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। समितियां स्कूलों में संसाधन जुटाने, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएंगी।

इसके अलावा एसएमसी को स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का भी दायित्व दिया गया है, ताकि स्कूलों और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। इस पहल के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

गाइडलाइन के अनुसार, एसएमसी विभिन्न विभागों और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियों के साथ भी समन्वय स्थापित करेगी। इससे स्कूलों को अतिरिक्त संसाधन प्राप्त करने में मदद मिलेगी और शिक्षा के स्तर में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी से स्कूलों की निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।

अधिकारियों के अनुसार, नई एसएमसी संरचना को लागू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और इसके लिए स्कूल स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश भी भेजे जाएंगे।

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में एसएमसी के पुनर्गठन से सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सामुदायिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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