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दो दशक बाद डलहौजी के जंगलों में दिखा दुर्लभ हिमालयन सेरो

डलहौजी। हिमाचल प्रदेश के डलहौजी क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद कालाटॉप-खज्जीयार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से सटे जंगलों में दुर्लभ हिमालयन सेरो को कैमरे में कैद किया गया है। वन विभाग के फील्ड स्टाफ द्वारा बनाया गया यह वीडियो इस क्षेत्र में इस पहाड़ी खुर वाले जीव की मौजूदगी का पहला पक्का दृश्य प्रमाण माना जा रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रविवार को जंगल में नियमित गश्त के दौरान कर्मचारियों की नजर हिमालयन सेरो पर पड़ी। गश्ती दल ने तुरंत इस दुर्लभ वन्यजीव का वीडियो रिकॉर्ड किया। लंबे समय बाद इस प्रजाति के दिखाई देने से वन विभाग में उत्साह का माहौल है और इसे क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हिमालयन सेरो एक दुर्लभ पहाड़ी स्तनधारी जीव है, जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। यह जीव अपनी सतर्क प्रकृति और छिपकर रहने की आदत के कारण आसानी से दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि इसका कैमरे में कैद होना वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयन सेरो को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की सूची में ‘नियर थ्रेटन्ड’ यानी विलुप्त होने के खतरे के करीब वाली श्रेणी में रखा गया है। इसके आवास क्षेत्र में बदलाव, जंगलों पर बढ़ता दबाव और मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या और वितरण प्रभावित हुए हैं।
कालाटॉप-खज्जीयार क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां देवदार, चीड़ और अन्य हिमालयी वनस्पतियों के साथ कई दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। वन विभाग लगातार इस क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण के लिए गश्त करता है।
अधिकारियों ने बताया कि हिमालयन सेरो का यह रिकॉर्ड क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी और पर्यावरणीय संतुलन का संकेत देता है। इससे यह भी पता चलता है कि डलहौजी के आसपास के जंगल अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास बने हुए हैं।
वन विभाग अब इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हिमालयन सेरो यहां कितनी संख्या में मौजूद हैं और उनका आवास क्षेत्र कितना विस्तृत है। इसके लिए कैमरा ट्रैप और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
वन अधिकारियों का कहना है कि दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद संरक्षण गतिविधियों को और मजबूत किया जाएगा। जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित करने, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर भी इस खबर को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। डलहौजी क्षेत्र पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए वन्यजीवों की विविधता हमेशा आकर्षण का केंद्र रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्लभ जीवों को देखने के लिए जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि वन्यजीवों को कोई नुकसान न पहुंचे।
पिछले वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में कई वन्यजीव प्रजातियों की संख्या और उनके आवास को लेकर चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में हिमालयन सेरो जैसे दुर्लभ जीव का दो दशक बाद दिखाई देना संरक्षण प्रयासों के लिए उत्साहजनक संकेत है।
वन विभाग का मानना है कि यह खोज न केवल डलहौजी क्षेत्र की जैव विविधता को उजागर करती है, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित करती है। दुर्लभ प्रजातियों की निगरानी और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण की अहम प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।
हिमालयन सेरो का यह वीडियो अब वन्यजीव विशेषज्ञों के अध्ययन का आधार बनेगा। उम्मीद है कि आगे की निगरानी से इस प्रजाति के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी और डलहौजी के जंगलों में इसके संरक्षण के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी।





