हिमाचल प्रदेश

कुल्लू में बारिश का कहर, स्कूल तबाह और बागानों को नुकसान

Kavita2
3 Aug 2026 11:37 AM IST
कुल्लू में बारिश का कहर, स्कूल तबाह और बागानों को नुकसान
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हिमाचल प्रदेश : कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्राकृतिक आपदा के चलते एक सरकारी स्कूल भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कई अन्य इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है।

बारिश और बाढ़ के कारण क्षेत्र में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में अचानक आए मलबे और पानी के तेज बहाव ने लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर कर दिया। कई परिवारों ने रात सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों में बिताई, क्योंकि उनके घरों के आसपास खतरा बना हुआ था।

निरमंड क्षेत्र की पंचायत बारी के पांकवा गांव में वर्ष 1993 में निर्मित सरकारी प्राइमरी स्कूल भवन भूस्खलन की चपेट में आ गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण स्कूल भवन को काफी नुकसान पहुंचा और वह अब उपयोग के लायक नहीं रह गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहाड़ी से अचानक आए मलबे ने स्कूल भवन को अपनी चपेट में ले लिया। राहत की बात यह रही कि घटना रात के समय हुई, जब स्कूल में बच्चे और शिक्षक मौजूद नहीं थे। इसके कारण किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

स्कूल भवन के क्षतिग्रस्त होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन की ओर से स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार किया जा सकता है।

बारिश से केवल सरकारी भवन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका पर भी बड़ा असर पड़ा है। क्षेत्र में सेब के बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के अनुसार, बाढ़ और मलबे के कारण सेब के 500 से ज्यादा पौधे तबाह हो गए हैं। इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कुल्लू जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में सेब की खेती लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में बागानों के नुकसान से किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है। लंबे समय तक पेड़ों को हुए नुकसान का असर आने वाले मौसम की पैदावार पर भी पड़ सकता है।

फ्लैश फ्लड के कारण कई स्थानों पर सड़कें प्रभावित हुई हैं और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। मलबा आने से लोगों की आवाजाही में परेशानी हो रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का आकलन कर रही हैं।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए लोगों को संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

आपदा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है। जिन लोगों के घरों को खतरा है, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि अचानक आई इस आपदा से उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों का घरेलू सामान खराब हो गया है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो रही है।

मौसम विभाग की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश को लेकर समय-समय पर चेतावनी जारी की जाती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान पहाड़ों में मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

कुल्लू जिले के निरमंड क्षेत्र में हुई इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

फिलहाल क्षेत्र में हालात पर नजर रखी जा रही है। स्कूल भवन के नुकसान, बागानों की तबाही और प्रभावित परिवारों की समस्याओं को देखते हुए जल्द राहत और पुनर्वास की जरूरत महसूस की जा रही है।

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