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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल में बारिश बनी आफत मॉनसून सीजन में 3,220 करोड़ का नुकसान
Ratna Netam
28 Sept 2026 6:37 PM IST

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शिमला : हिमाचल प्रदेश में इस साल मॉनसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। राज्य के आपदा संबंधी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 30 जून से 28 सितंबर तक चले 91 दिनों के मॉनसून सीजन में प्रदेश को कुल 3,220 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।इस दौरान राज्य में 373 लोगों की मौत दर्ज की गई है। आपदा के कारण हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सात सदस्यीय इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम (IMCT) ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश का चार दिवसीय दौरा शुरू किया।
केंद्रीय टीम करेगी नुकसान का आकलन
केंद्रीय टीम हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, अचानक आई बाढ़, भूस्खलन और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं से हुए नुकसान का मौके पर जाकर जायजा लेगी।राज्य सरकार की ओर से मॉनसून आपदा से हुए नुकसान को लेकर केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें करीब 3,200 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की गई है।केंद्रीय टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।
आपदाओं में गई 152 लोगों की जान
आंकड़ों के मुताबिक, मॉनसून के दौरान दर्ज हुई कुल 373 मौतों में से 152 मौतें सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुईं।इनमें भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, डूबने की घटनाएं, सांप के काटने और खड़ी ढलानों से गिरने जैसी घटनाएं शामिल हैं।पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने जैसी घटनाएं लगातार सामने आती हैं।
सड़क हादसों में 221 मौतें
आपदा संबंधी आंकड़ों में बताया गया है कि मॉनसून अवधि के दौरान सड़क हादसों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।बारिश के मौसम में हुई सड़क दुर्घटनाओं में 221 लोगों की मौत दर्ज की गई है।पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम, फिसलन भरी सड़कें और यातायात संबंधी चुनौतियां दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती हैं।
करोड़ों की संपत्ति को नुकसान
मॉनसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।भारी बारिश के कारण कई इलाकों में सड़कें टूट गईं, पुल क्षतिग्रस्त हुए और लोगों के घरों व अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा।राज्य सरकार के अनुसार, आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य लगातार जारी हैं।
बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं बनीं चुनौती
इस मॉनसून सीजन में हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।इन घटनाओं के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।प्रशासन और राहत एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाए।
राहत और पुनर्निर्माण पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के साथ-साथ पुनर्निर्माण पर भी ध्यान दे रही है।क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्र से आर्थिक मदद की मांग
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मॉनसून से हुए नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है।राज्य सरकार ने करीब 3,200 करोड़ रुपये की मदद के लिए ज्ञापन सौंपा है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास कार्यों को गति दी जा सके।
केंद्रीय रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
IMCT की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से आगे की सहायता और राहत उपायों पर फैसला लिया जा सकता है।केंद्रीय टीम के दौरे को राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके आधार पर नुकसान का विस्तृत आकलन सामने आएगा।हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने व्यापक असर डाला है। अब सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को जल्द बहाल करना है।
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