हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में बारिश का कहर, 185 सड़कें बंद

Kavita2
8 Aug 2026 11:56 AM IST

शिमला। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी रहने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन, मलबा और जलभराव जैसी स्थिति के कारण सड़क संपर्क बाधित हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के अनुसार, भारी बारिश के चलते प्रदेश में कुल 185 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ा है और 104 ट्रांसफॉर्मर खराब होने की सूचना है। वहीं, 77 पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

बारिश के कारण सबसे ज्यादा सड़कें मंडी और कुल्लू जिलों में बंद हुई हैं। मंडी में 92 और कुल्लू में 48 सड़कें यातायात के लिए बाधित हैं। इसके अलावा शिमला और चंबा में 14-14, सिरमौर में नौ, कांगड़ा में पांच और ऊना में तीन सड़कें बंद हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में बहाली के काम में जुटी हुई हैं।

मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित

राज्य में बंद 185 सड़कों में सबसे बड़ा हिस्सा मंडी जिले का है। यहां 92 सड़कें बंद होने से कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हुई है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने की घटनाओं से यातायात व्यवस्था को चुनौती मिल रही है।

सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों को बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करना प्रशासन के लिए प्राथमिकता बना हुआ है।

मंडी के बाद कुल्लू जिला सड़क बंद होने के मामले में दूसरे स्थान पर है। यहां 48 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में पहाड़ी इलाकों और नदी-नालों के आसपास बारिश के कारण सड़क नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है।

शिमला और चंबा में भी हालात चुनौतीपूर्ण

राजधानी शिमला समेत चंबा जिले में भी बारिश के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। दोनों जिलों में 14-14 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान सड़क किनारे चट्टानों और मिट्टी के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कई जगह यातायात रोकना पड़ता है ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।

सिरमौर में नौ, कांगड़ा में पांच और ऊना में तीन सड़कें बंद हैं। प्रशासन इन क्षेत्रों में भी हालात पर नजर बनाए हुए है।

बिजली व्यवस्था पर भी बारिश की मार

भारी बारिश का असर केवल सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। राज्य में कुल 104 ट्रांसफॉर्मर खराब होने की जानकारी है।

ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। बारिश और खराब मौसम के बीच बिजली बहाली का काम कर्मचारियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बिजली विभाग की टीमें प्रभावित स्थानों पर पहुंचकर आपूर्ति बहाल करने के प्रयास में जुटी हैं।

जिलेवार आंकड़ों में कुल्लू सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां 53 ट्रांसफॉर्मर खराब हुए हैं। इसके बाद मंडी में 34, किन्नौर में 12, शिमला में चार और चंबा में एक ट्रांसफॉर्मर खराब होने की जानकारी दी गई है।

कुल्लू और मंडी में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की संख्या सबसे अधिक है। इससे इन जिलों के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा है।

77 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित

भारी बारिश और खराब मौसम के चलते प्रदेश की 77 पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान पेयजल स्रोतों में मलबा आने, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने या जल आपूर्ति ढांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है।

पेयजल योजनाओं के बाधित होने से स्थानीय आबादी के सामने पानी की समस्या पैदा हो सकती है। संबंधित विभाग प्रभावित योजनाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा सकती है।

बहाली कार्य में जुटी विभागीय टीमें

सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं की बहाली के लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। सड़क बंद होने वाले स्थानों पर मलबा हटाने और यातायात बहाल करने का काम किया जा रहा है।

हालांकि, कई पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की स्थिति में बहाली कार्य प्रभावित हो सकता है। यदि बारिश के कारण दोबारा भूस्खलन या मलबा आता है तो पहले से साफ की गई सड़कें भी फिर बंद हो सकती हैं।

ऐसे में प्रशासन के सामने सिर्फ सड़क खोलने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार निगरानी भी रखनी पड़ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा असर

बारिश से सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सेवाओं के बाधित होने का असर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर ज्यादा पड़ता है। कई गांव मुख्य सड़कों से जुड़े होते हैं और सड़क बंद होने पर जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने, किसानों की उपज बाजार तक ले जाने और रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी परेशानी आ सकती है। इसलिए प्रशासन के लिए ग्रामीण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलना महत्वपूर्ण है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

भारी बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। भूस्खलन और अचानक मलबा गिरने की घटनाएं यात्रियों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

नदियों और नालों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है। बारिश के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।

मौसम की चुनौती के बीच प्रशासन की परीक्षा

हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण एक साथ सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं का प्रभावित होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। 185 सड़कें बंद, 104 ट्रांसफॉर्मर खराब और 77 पेयजल योजनाओं के बाधित होने से साफ है कि बारिश का असर व्यापक है।

मंडी और कुल्लू सड़क तथा बिजली व्यवस्था के लिहाज से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। प्रशासन और विभागीय टीमें सेवाओं को सामान्य करने में जुटी हैं। आने वाले समय में बारिश की स्थिति और भूस्खलन जैसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि मौसम खराब रहने पर नुकसान और बढ़ने की आशंका बनी रह सकती है।

फिलहाल राज्य सरकार और जिला प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित सड़कों को खोलने, बिजली आपूर्ति बहाल करने और पेयजल योजनाओं को दोबारा चालू करने की है, ताकि बारिश से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

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