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नूरपुर। हिमाचल प्रदेश के नूरपुर स्थित 200 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर स्थानीय संस्था ‘रणजीत बख्शी जन कल्याण फाउंडेशन’ ने चिंता जताई है। फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं, जिसके कारण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
फाउंडेशन के निदेशक अकील बख्शी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि नूरपुर क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन वर्तमान में अस्पताल कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करने के बजाय स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर राजनीति अधिक हो रही है।
अकील बख्शी ने कहा कि 200 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल में कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन), रेडियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) और नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थल्मोलॉजिस्ट) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। इससे मरीजों को जरूरी जांच और उपचार के लिए अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े अस्पताल के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि खाली पदों को जल्द भरा जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सके।
फाउंडेशन ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में जरूरी मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने को लेकर पहले हुई बैठकों में आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई। अकील बख्शी ने दावा किया कि स्थानीय विधायक और रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष रणबीर सिंह पिछली बैठक में किए गए मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराने के वादे को पूरा नहीं कर सके हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धरातल पर काम होना जरूरी है। अस्पताल में आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से ही मरीजों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
फाउंडेशन के निदेशक ने नूरपुर में प्रस्तावित 50 बिस्तरों वाले ‘मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल’ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल लंबे समय से शुरू होने का इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह से संचालित नहीं किया जा सका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पिछले लगभग चार वर्षों से इस अस्पताल को शुरू करने को लेकर केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की फंडिंग से तैयार किए गए इस अस्पताल का लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए था, लेकिन संचालन शुरू न होने के कारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अकील बख्शी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता होती है। यदि मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शुरू हो जाता है तो क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और उन्हें दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि नूरपुर और आसपास के क्षेत्रों की आबादी को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत है। उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करें।
फाउंडेशन ने मांग की कि सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जल्द नियुक्ति की जाए, आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल को जल्द शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन और सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े इन मुद्दों को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता है। उनका कहना है कि बड़े अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद यदि विशेषज्ञ डॉक्टर और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।
फिलहाल फाउंडेशन की ओर से उठाए गए सवालों पर प्रशासन और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नूरपुर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाते हैं।





