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हिमाचल प्रदेश
AIIMS बिलासपुर के पहले बैच को राष्ट्रपति मुर्मू ने बांटी डिग्रियां
Ratna Netam
6 Oct 2026 3:10 PM IST

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बिलासपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज एम्स बिलासपुर के पहले बैच के ग्रेजुएट्स को डिग्री प्रदान की। संस्थान के लिए यह अवसर ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार यहां से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को औपचारिक रूप से डिग्री दी गई। इस उपलब्धि को एम्स बिलासपुर के विकास के साथ-साथ देश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दीक्षांत समारोह में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों और गोल्ड मेडलिस्ट को बधाई दी। उन्होंने छात्रों की सफलता में योगदान देने वाले उनके माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों की भी सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि मेडिकल शिक्षा का सफर कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर समर्पण की मांग करता है और इस पूरी यात्रा में परिवार और शिक्षकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि एम्स बिलासपुर से ग्रेजुएट होने वाला यह पहला बैच है, इसलिए संस्थान की पहचान और भविष्य की विरासत को आकार देने में इन छात्रों की विशेष भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में संस्थान की प्रतिष्ठा काफी हद तक उसके पूर्व छात्रों के आचरण, कार्य और समाज के प्रति उनके योगदान से भी तय होगी।उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने पेशेवर जीवन में ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा भाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। राष्ट्रपति ने कहा कि मेडिकल प्रोफेशन केवल करियर का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का एक महत्वपूर्ण दायित्व भी है। डॉक्टरों के फैसले सीधे लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और परिवारों से जुड़े होते हैं, इसलिए उनसे समाज को बड़ी उम्मीदें रहती हैं।
राष्ट्रपति ने ग्रेजुएट्स को यह याद दिलाया कि मेडिकल क्षेत्र में ज्ञान और तकनीक लगातार बदल रही है। ऐसे में डॉक्टरों के लिए केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवनभर सीखते रहने की प्रवृत्ति बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में नई तकनीकों, शोध और उपचार पद्धतियों का निरंतर विकास हो रहा है और डॉक्टरों को इन बदलावों के साथ खुद को अपडेट रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंचें। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलना जरूरी है। उन्होंने नए डॉक्टरों से अपेक्षा जताई कि वे अपने ज्ञान और प्रशिक्षण का उपयोग केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखें, बल्कि जरूरतमंद और वंचित वर्गों तक भी चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रयास करें।
राष्ट्रपति ने मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को भी चिकित्सा पेशे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कई बार मरीज और उनके परिजन बीमारी के कारण मानसिक दबाव में होते हैं। ऐसे में डॉक्टर का व्यवहार, संवाद और सहानुभूति भी इलाज का अहम हिस्सा बन जाते हैं। मेडिकल प्रोफेशन में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही जरूरी है।एम्स बिलासपुर का पहला दीक्षांत समारोह संस्थान के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है। पहले बैच के छात्रों के ग्रेजुएट होने के साथ संस्थान ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया है। आने वाले समय में यहां से बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवाएं देंगे।
राष्ट्रपति ने गोल्ड मेडल पाने वाले छात्रों को विशेष रूप से बधाई दी और कहा कि उनकी उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। साथ ही उन्होंने अन्य छात्रों से भी कहा कि सफलता को केवल मेडल या रैंक से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि समाज के प्रति उनके योगदान और पेशेवर मूल्यों से भी उनकी पहचान बनेगी।समारोह के दौरान चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एम्स बिलासपुर की भूमिका भी रेखांकित हुई। संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले पहले बैच से उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी सेवाओं से न केवल संस्थान का नाम रोशन करेंगे, बल्कि मरीजों के भरोसे को भी मजबूत करेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंत में छात्रों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे जहां भी कार्य करें, मानवता, सेवा और नैतिक मूल्यों को अपने पेशे का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर का असली सम्मान केवल उसकी विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति उसके व्यवहार और समाज के लिए किए गए योगदान से भी तय होता है।एम्स बिलासपुर के पहले बैच को डिग्री प्रदान किया जाना संस्थान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है। यह अवसर उन छात्रों के लिए भी खास रहा, जिन्होंने संस्थान की शुरुआती शैक्षणिक यात्रा का हिस्सा बनकर अब मेडिकल प्रोफेशन में अपनी नई पारी की शुरुआत की है।
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