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पटवारी-कानूनगो और तहसीलदारों की पुनर्नियुक्ति की तैयारी

हिमाचल प्रदेश: शिमला जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग के खाली पड़े पदों को भरने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने 75 राजस्व पदों पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 70 पटवारी, चार कानूनगो और एक तहसीलदार के पदों के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों से आवेदन मांगे गए हैं। उपायुक्त कार्यालय शिमला की ओर से 25 जुलाई को जारी विज्ञापन के बाद अब यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 3 अगस्त तय की गई है।
प्रशासन के इस फैसले से जहां लंबित राजस्व मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के हजारों बेरोजगार युवाओं में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। युवा लंबे समय से पटवारी और अन्य राजस्व विभाग के पदों पर नियमित भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में रिटायर्ड कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि राजस्व विभाग में लंबे समय से कई पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। जमीन से संबंधित मामलों जैसे तकसीम यानी बंटवारा, इंतकाल, सीमांकन, विरासत और अन्य राजस्व प्रकरणों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा है। मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन के अनुसार, नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है। ऐसे में अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएं लेकर लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि रिटायर्ड कर्मचारियों के पास राजस्व विभाग के काम का लंबा अनुभव होता है, जिससे कामकाज को गति मिल सकती है और लोगों को जल्द राहत मिलेगी।
हालांकि, युवाओं का कहना है कि सरकार को अस्थायी व्यवस्था के बजाय नियमित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। पटवारी और अन्य राजस्व पदों पर भर्ती निकलने का इंतजार कर रहे युवाओं को उम्मीद थी कि खाली पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी।
युवाओं का आरोप है कि बार-बार रिटायर्ड कर्मचारियों की सेवाएं लेने से नए उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि विभाग में काम का इतना दबाव है कि अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ रही है तो सरकार को नियमित भर्ती करवाकर युवाओं को मौका देना चाहिए।
शिमला जिले में राजस्व विभाग का काम सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है। जमीन की खरीद-बिक्री, भूमि रिकॉर्ड में बदलाव, सरकारी योजनाओं के लिए दस्तावेजों की जांच और अन्य जरूरी कार्यों के लिए पटवारी और कानूनगो की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पद खाली होने से लोगों को अपने काम के लिए कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और मामलों के निपटारे में देरी होती है।
प्रशासन का कहना है कि पुनर्नियुक्ति का उद्देश्य केवल लंबित मामलों को कम करना है और यह व्यवस्था नियमित भर्ती का विकल्प नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होगी, नई नियुक्तियां की जाएंगी।
अब देखना होगा कि शिमला प्रशासन का यह फैसला राजस्व मामलों के समाधान में कितना प्रभावी साबित होता है और युवाओं की नियमित भर्ती की मांग पर सरकार क्या कदम उठाती है। फिलहाल रिटायर्ड कर्मचारियों की नियुक्ति और युवाओं की रोजगार उम्मीदों के बीच बहस तेज हो गई है।





