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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल में AIIMS आयुर्वेद संस्थान की तैयारी टॉप पांच राज्यों में शामिल
Ratna Netam
23 Sept 2026 9:40 PM IST

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने और आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के आयुष मंत्री यदविंदर गोमा ने बुधवार को कहा कि हिमाचल प्रदेश में एम्स की तर्ज पर आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित इस परियोजना के लिए जिन राज्यों पर विचार किया जा रहा है, उनमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है।यदविंदर गोमा शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में आयुर्वेद, पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों, स्वस्थ जीवनशैली और आयुष आधारित चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया गया।इस अवसर पर तीन दिवसीय प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में केंद्रीय आयुष मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा तथा स्वस्थ जीवनशैली के क्षेत्र में चलाई जा रही विभिन्न पहलों और योजनाओं को प्रदर्शित किया गया।आयुष मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने एम्स आयुर्वेद संस्थान की स्थापना के लिए विभिन्न राज्यों से प्रस्ताव मांगे थे। हिमाचल प्रदेश ने भी इस दिशा में अपनी दावेदारी पेश की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए जिन शीर्ष पांच राज्यों पर विचार किया जा रहा है, उनमें हिमाचल प्रदेश शामिल है।
आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने पर जोर
मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद की मजबूत परंपरा रही है। पहाड़ी राज्य में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की विविधता भी आयुर्वेद के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। ऐसे में अगर राज्य में एम्स स्तर का आयुर्वेद संस्थान स्थापित होता है तो इससे इलाज के साथ शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आयुर्वेद और दूसरी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाना है, ताकि लोगों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।प्रस्तावित संस्थान को लेकर अभी अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की प्रक्रिया के बाद होना है। हिमाचल प्रदेश सरकार फिलहाल इस परियोजना को राज्य में लाने के लिए प्रयास कर रही है। मंत्री के मुताबिक शीर्ष पांच राज्यों में शामिल होना राज्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में मिल सकती है मदद
एम्स आयुर्वेद संस्थान स्थापित होने की स्थिति में हिमाचल प्रदेश में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ सकता है। यहां मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।इसके अलावा आयुर्वेदिक औषधियों, औषधीय पौधों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों पर वैज्ञानिक शोध के लिए भी बड़ा मंच मिल सकता है। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और यहां पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियों को देखते हुए अनुसंधान की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।राज्य सरकार आयुष क्षेत्र को केवल उपचार तक सीमित रखने के बजाय इसे स्वास्थ्य शिक्षा, रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से भी जोड़ने पर जोर दे रही है।
तीन दिवसीय प्रदर्शनी में दिखाई गईं योजनाएं
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के मौके पर आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी में केंद्र और राज्य सरकार की आयुष क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं तथा पहलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई गई। इसमें पारंपरिक चिकित्सा के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और आयुर्वेद के दैनिक जीवन में उपयोग से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की गई।कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें स्वास्थ्य संरक्षण में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका से परिचित कराना भी रहा।आयुर्वेद दिवस के आयोजन के दौरान विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी पारंपरिक चिकित्सा की उपयोगिता तथा बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की।
आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान को मिल सकता है बढ़ावा
राज्य में बड़े आयुर्वेद संस्थान की स्थापना होने पर सबसे महत्वपूर्ण लाभ शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र को मिलने की संभावना है। इससे आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उच्च स्तर की शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।साथ ही विभिन्न बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक पद्धतियों के उपयोग, औषधीय पौधों की पहचान, दवाओं के मानकीकरण और उपचार पद्धतियों पर शोध को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसी जड़ी-बूटियां और औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं जिनका पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होता रहा है। संस्थागत स्तर पर अनुसंधान बढ़ने से इन प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं
यदि हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित एम्स आयुर्वेद संस्थान स्थापित होता है तो स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। डॉक्टर, शिक्षक, शोधकर्ता, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के अलावा प्रशासनिक तथा अन्य सेवाओं में भी मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।इसके साथ औषधीय पौधों की खेती और आयुर्वेदिक दवा निर्माण से जुड़े क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की संभावना है। राज्य के किसान अगर वैज्ञानिक तरीके से औषधीय पौधों की खेती से जुड़ते हैं तो आय के वैकल्पिक साधन विकसित हो सकते हैं।हालांकि परियोजना को लेकर आगे की तस्वीर केंद्र सरकार की चयन प्रक्रिया और अंतिम मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश
गेयटी थिएटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद को केवल बीमारी के उपचार की पद्धति के बजाय स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। आयुष मंत्री ने लोगों से दैनिक जीवन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक तथा जिम्मेदार तरीके से उपयोग करने की बात कही।सरकार का मानना है कि आयुष सेवाओं के विस्तार से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में कई क्षेत्र भौगोलिक रूप से कठिन हैं, इसलिए प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण चुनौती है।यदविंदर गोमा ने कहा कि राज्य सरकार आयुष क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। एम्स आयुर्वेद संस्थान की स्थापना इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।फिलहाल हिमाचल प्रदेश इस महत्वपूर्ण परियोजना की दौड़ में शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से अंतिम चयन होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संस्थान किस राज्य में स्थापित किया जाएगा। अगर हिमाचल प्रदेश का चयन होता है तो इससे राज्य में आयुर्वेदिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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