हिमाचल प्रदेश

नूरपुर में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली, 4 साल बाद भी खर्च नहीं हुए 13 लाख रुपये

Kiran
28 Oct 2026 2:41 PM IST
नूरपुर में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली, 4 साल बाद भी खर्च नहीं हुए 13 लाख रुपये
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नूरपुर शहर में पांच जगहों पर सार्वजनिक शौचालयों और स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत 13.16 लाख रुपये मंजूर किए गए थे, लेकिन स्थानीय नगर परिषद (MC) की लापरवाही के कारण पिछले चार वर्षों से इस राशि का इस्तेमाल नहीं हो पाया है। राज्य के शहरी विकास विभाग ने 2022-23 वित्तीय वर्ष के दौरान 16 सार्वजनिक शौचालयों और मूत्रालयों के निर्माण और नवीनीकरण के लिए 13,16,452 रुपये मंजूर किए थे। हालांकि, इन फंड का इस्तेमाल न कर पाना नगर निकाय की प्राथमिकताओं, प्रशासनिक कार्यक्षमता और जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं मुहैया कराने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।
पिछली भाजपा सरकार ने ये फंड मंजूर किए थे, लेकिन उस समय भाजपा समर्थित नूरपुर नगर परिषद इनका इस्तेमाल करने में नाकाम रही। वर्तमान कांग्रेस समर्थित परिषद ने भी प्रस्तावित शौचालयों के निर्माण और केंद्र सरकार की योजना के तहत मंजूर फंड को खर्च करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे यह सार्वजनिक सुविधा परियोजना अधर में लटक गई है।
शहरी विकास विभाग के निदेशक द्वारा 8 अगस्त 2022 को जारी एक पत्र के अनुसार, यह राशि केंद्र प्रायोजित 'स्वच्छ भारत मिशन' के 'सामुदायिक सार्वजनिक शौचालय' घटक के तहत मंजूर की गई थी। 'द ट्रिब्यून' के पास मौजूद इस पत्र की एक प्रति के अनुसार, नगर परिषद को निर्देश दिया गया था कि वह जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद योजना के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इन फंड का इस्तेमाल करे।
प्रस्तावित कार्यों में आर्चीज पार्क के पास दो मूत्रालय, नूरपुर पब्लिक स्कूल के पास चार, सूखा तालाब मैदान में दो, गुप्त गंगा के पास चार और कोर्ट कॉम्प्लेक्स के पास चार मूत्रालय/शौचालय शामिल थे। इन जगहों पर स्थानीय निवासी, खरीदारी करने वाले लोग, छात्र और सार्वजनिक संस्थानों व स्थानीय बाजारों में आने वाले लोग आते हैं। इतनी लंबी देरी ने स्वच्छता बुनियादी ढांचे के लिए फंड आवंटित करने के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर दिया है। सार्वजनिक शौचालय एक बहुत जरूरी नागरिक सुविधा है, खासकर भीड़-भाड़ वाले बाजारों और सार्वजनिक संस्थानों के आसपास; जहां इनके न होने या ठीक से रखरखाव न होने से लोगों को काफी परेशानी होती है।
स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद के अधिकारियों से मांग की है कि वे मंजूर किए गए फंड की मौजूदा स्थिति के बारे में बताएं, सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में हुई देरी का कारण स्पष्ट करें और यह सुनिश्चित करें कि बिना और समय बर्बाद किए ये सुविधाएं तैयार की जाएं। उन्होंने इन कार्यों को पूरा न कर पाने के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने की मांग की है।
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