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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता सीमा ठाकुर ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों, कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करके जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। सीमा ठाकुर ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान सीमा ठाकुर ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रिया को लेकर गलत धारणाएं फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेता राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू और कांग्रेस नेताओं पर निशाना
भाजपा प्रवक्ता सीमा ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों की आलोचना करते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को जनता के सामने सही जानकारी रखनी चाहिए।उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनके मंत्री, कांग्रेस नेता और INDIA गठबंधन के नेता SIR को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। यह शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।"ठाकुर ने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यह भाजपा प्रवक्ता का राजनीतिक आरोप है।
SIR के विरोध पर भाजपा ने उठाए सवाल
सीमा ठाकुर ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए।उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची का महत्व है और इससे जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर लोगों में भ्रम नहीं फैलाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनावी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारीपूर्वक अपनी बात रखनी चाहिए।भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्ष मतदाता सूची के मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप दे रहा है।
कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए हैं सवाल
दूसरी ओर, कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई नेता SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।हालांकि, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जाती है।
हिमाचल में कांग्रेस ने किया था विरोध-प्रदर्शन
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी हाल के दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किए हैं।7 अक्टूबर को शिमला में कांग्रेस नेताओं ने विपक्षी नेताओं की हिरासत के विरोध में लोक भवन के बाहर प्रदर्शन किया था। इसमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पार्टी के अन्य नेता शामिल हुए थे।इसके बाद 8 अक्टूबर को प्रदेश के विभिन्न जिला मुख्यालयों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा SIR का विवाद
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित विवाद अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है।याचिका में SIR से संबंधित कुछ फैसलों को चुनौती दी गई है। अदालत के नोटिस का अर्थ है कि संबंधित पक्षों से उनका जवाब मांगा गया है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
मतदाता सूची को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना और नियमों के अनुसार अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।विपक्षी दल प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर चिंताएं जता रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा किया जा रहा है।सीमा ठाकुर के ताजा बयान के बाद हिमाचल प्रदेश में SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप एक बार फिर तेज हो गए हैं।
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