हिमाचल प्रदेश

Himachal में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, सीएम सुखू ने उठाए सवाल

Ratna Netam
13 April 2026 5:48 PM IST
Himachal में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, सीएम सुखू ने उठाए सवाल
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि वह “अपनी कुर्सी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की सियासत में गर्माहट और बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह टिप्पणी हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान और मीडिया से बातचीत में की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार को घेरना होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में विपक्ष के नेता अपनी ही राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने और पार्टी के भीतर अपनी पकड़ बनाए रखने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। सीएम सुक्खू के अनुसार, विपक्ष जनता के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक बयानबाज़ी में उलझा हुआ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष विकास कार्यों को लेकर गलतफहमियां फैलाने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार जनता के हित में लगातार काम कर रही है और कई योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर है, जबकि विपक्ष केवल आलोचना की राजनीति कर रहा है।
दूसरी ओर, विपक्षी खेमे ने मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए खारिज किया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। जयराम ठाकुर खेमे की ओर से कहा गया है कि विपक्ष जनता की समस्याओं को लगातार उठाता रहेगा, चाहे सरकार कितना भी दबाव बनाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ रहा है। विधानसभा चुनावों के बाद से ही दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जो अब और अधिक तीखा होता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाज़ी से राजनीतिक माहौल तो गर्म होता है, लेकिन विकास के मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सामान्य राजनीतिक बयान मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि नेताओं को जनता की समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए न कि व्यक्तिगत आरोपों पर।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर हिमाचल की राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह सियासी बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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