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हिमाचल प्रदेश
चिट्टा मुक्त बनाने का संकल्प: एंटी चिट्टा वॉकथॉन को सीएम सुक्खू ने दिखाई हरी झंडी
SHIDDHANT
16 Dec 2025 9:22 PM IST

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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश: नशा मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर में आयोजित एंटी चिट्टा वॉकथॉन जागरूकता कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिमाचल प्रदेश को चिट्टा (ड्रग्स) मुक्त बनाना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है, और इस मुहिम में आम जनता का व्यापक सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ जन-जागरूकता है, जिसके तहत युवाओं, अभिभावकों और समाज के हर वर्ग को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। दूसरा स्तंभ पुलिस की सक्रिय कार्रवाई है, जिसमें चिट्टा तस्करी और नशे के अवैध नेटवर्क पर लगातार छापेमारी की जा रही है। तीसरा और सबसे अहम स्तंभ है—नशे में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, “सभी लोग चाहते हैं कि हिमाचल प्रदेश चिट्टा मुक्त बने। इसमें समाज के सभी लोग हमारे साथ हैं। हम युवाओं को जागरूक कर रहे हैं ताकि वे नशे से दूर रहें और अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।” उन्होंने कहा कि सरकार केवल कानून के जरिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के माध्यम से भी इस समस्या से निपटना चाहती है। वॉकथॉन कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं, छात्र-छात्राओं, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं को नशे के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें भाग लेकर यह दिखाया कि समाज अब नशे के खिलाफ खुलकर खड़ा है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे न केवल खुद नशे से दूर रहें, बल्कि अपने मित्रों और परिवारजनों को भी इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें।
सीएम सुक्खू ने कहा कि चिट्टा जैसे खतरनाक नशे ने कई परिवारों को बर्बाद किया है और युवा पीढ़ी को गहरे संकट में डाला है। इसे जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने पुलिस और प्रशासन को पूरी छूट दी है। नशा तस्करों, सप्लायरों और इस अवैध धंधे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि नशे के कारोबार में लिप्त लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश में कोई जगह नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार पुनर्वास और काउंसलिंग पर भी जोर दे रही है, ताकि जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें सही मार्ग पर वापस लाया जा सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों के सहयोग से विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में हिमाचल को नशा मुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया। अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब तक हर नागरिक इसमें अपनी भूमिका नहीं निभाएगा, तब तक नशे के खिलाफ निर्णायक जीत संभव नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनभागीदारी से हिमाचल प्रदेश को जल्द ही चिट्टा मुक्त राज्य बनाया जाएगा।
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