हिमाचल प्रदेश

अस्पताल की छत से गिरा प्लास्टर, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी घायल, बाल-बाल बचे मरीज

Kavita2
20 Oct 2026 5:09 PM IST
अस्पताल की छत से गिरा प्लास्टर, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी घायल, बाल-बाल बचे मरीज
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में सोमवार देर रात जर्जर भवन की छत से सीमेंट और प्लास्टर की भारी परत अचानक टूटकर गिर गई। इस हादसे में रात की ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी नरेश कुमार घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि घटना के समय अस्पताल में मौजूद मरीज इसकी चपेट में आने से बच गए। घायल कर्मचारी को अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ नर्स ने तत्काल प्राथमिक उपचार दिया। बताया जा रहा है कि इसी अस्पताल के डेंटल क्लीनिक की छत से पहले भी सीमेंट की परत गिर चुकी है। इसके बावजूद दोबारा हादसा होने से भवन की हालत और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

रात 11 बजे अचानक छत से गिरा भारी प्लास्टर

मिली जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार रात करीब 11 बजे की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में कर्मचारी नरेश कुमार अपनी निर्धारित रात्रिकालीन ड्यूटी कर रहे थे।

इसी दौरान अचानक अस्पताल भवन की छत से सीमेंट और प्लास्टर की भारी परत टूटकर नीचे गिर गई। यह मलबा सीधे नरेश कुमार के पांव पर गिरा, जिससे वह घायल हो गए।

अचानक हुई इस घटना से अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल बन गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि छत से इस तरह भारी सीमेंट की परत टूटकर गिर सकती है।

हादसे के समय अस्पताल में मरीज भी मौजूद थे, लेकिन सौभाग्य से कोई मरीज इसकी चपेट में नहीं आया।

सिर पर गिरता मलबा तो हो सकता था बड़ा हादसा

घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि छत से टूटा भारी प्लास्टर कर्मचारी के सिर के बजाय पैर पर गिरा।

यदि सीमेंट की भारी परत सिर या शरीर के किसी संवेदनशील हिस्से पर गिरती, तो गंभीर चोट आने की आशंका थी।

इस हादसे ने अस्पताल परिसर में मौजूद कर्मचारियों और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

एक स्वास्थ्य केंद्र, जहां लोग उपचार के लिए आते हैं, वहां भवन की छत से मलबा गिरना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर स्थिति है।

ऐसे हादसों से न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी जोखिम हो सकता है।

चिकित्सकों और स्टाफ नर्स ने दिया प्राथमिक उपचार

हादसा होने के बाद अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और स्टाफ नर्स ने घायल कर्मचारी नरेश कुमार को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया।

उनके पैर में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, चोट की गंभीरता और आगे के उपचार के संबंध में विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अस्पताल में ही ड्यूटी के दौरान घायल होने की इस घटना ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने ला दिया है।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी दिन-रात अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में भवन की मजबूत स्थिति और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक है।

डेंटल क्लीनिक में पहले भी गिर चुका है प्लास्टर

इस घटना को लेकर सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल की छत से प्लास्टर गिरने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार के डेंटल क्लीनिक की छत से पहले भी सीमेंट की परत टूटकर गिर चुकी है।

इससे अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बार-बार ऐसी घटनाएं होना भवन की मजबूती और नियमित रखरखाव की आवश्यकता को सामने लाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी इमारतों की छतों में नमी, सीलन और निर्माण सामग्री के कमजोर होने के कारण प्लास्टर टूटकर गिर सकता है। हालांकि, नौहराधार अस्पताल में प्लास्टर गिरने का वास्तविक कारण तकनीकी निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

नौहराधार अस्पताल में पहले से सुविधाओं की कमी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहा है।

मई 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास की 50 से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। यहां प्रतिदिन लगभग 80 से 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

अस्पताल में पर्याप्त बिस्तरों, चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को नाहन, राजगढ़ तथा दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता रहा है।

ऐसे में पुराने भवन की छत से मलबा गिरने की घटना ने स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा की समस्या को भी उजागर किया है।

नए अस्पताल भवन के निर्माण पर भी उठ रहे सवाल

नौहराधार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए लगभग 4.88 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन की परियोजना शुरू की गई थी।

इस भवन में 30 बिस्तरों के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें ऑपरेशन थिएटर, एक्सरे कक्ष, प्रयोगशाला, ओपीडी, विशेष वार्ड और चिकित्सकों के कक्ष शामिल हैं।

सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, नए भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद उद्घाटन टलने से स्वास्थ्य सेवाएं पुराने भवन में संचालित हो रही थीं।

अब पुराने भवन में कर्मचारी के घायल होने की घटना के बाद नए परिसर में चिकित्सा सेवाओं को स्थानांतरित करने की आवश्यकता और महत्वपूर्ण हो गई है।

भवन की सुरक्षा जांच कराने की आवश्यकता

अस्पताल में लगातार छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आने के बाद भवन की तकनीकी जांच कराना जरूरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी पुरानी इमारत में छत से मलबा गिरने पर केवल उस स्थान की मरम्मत पर्याप्त नहीं होती। भवन के अन्य कमजोर हिस्सों की भी जांच की जानी चाहिए।

अस्पताल में मरीजों के वार्ड, डेंटल क्लीनिक, उपचार कक्ष और कर्मचारियों के कार्यस्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

यदि किसी हिस्से की स्थिति असुरक्षित पाई जाती है, तो मरम्मत पूरी होने तक उसके उपयोग पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे जरूरी

सरकारी अस्पतालों में दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग भी शामिल होते हैं।

ऐसी स्थिति में अस्पताल की इमारत सुरक्षित होना स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी आवश्यकता है।

नौहराधार में हुई घटना के दौरान मरीज बाल-बाल बच गए, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी नरेश कुमार घायल हो गए।

यह हादसा बताता है कि भवन की जर्जर स्थिति को नजरअंदाज करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजरें

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौहराधार में हुई इस घटना के बाद अब भवन की सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक मरम्मत को लेकर संबंधित अधिकारियों के कदम महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल घायल कर्मचारी को प्राथमिक उपचार दिए जाने की जानकारी है। इस घटना पर किसी विभागीय जांच या विशेष मरम्मत आदेश की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अब आवश्यकता है कि अस्पताल भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाए और मरीजों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सोमवार रात हुआ यह हादसा गंभीर चोट या जानमाल की बड़ी क्षति का कारण भी बन सकता था। ऐसे में भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई आवश्यक है।

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