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हिमाचल प्रदेश
कांगड़ा में आवारा पशुओं पर पंचायतों की कार्रवाई, 80 मवेशियों को पहुंचाया गौशाला
Kiran
30 Oct 2026 3:05 PM IST

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कांगड़ा जिले के निचले इलाकों में आवारा और बेसहारा पशु किसानों और सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं। खेतों में खुलेआम घूम रहे ये जानवर खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। कांगड़ा जिले के जवाली विधानसभा क्षेत्र की भरुपलाहाड और मनेई ग्राम पंचायतों ने एक सराहनीय सामुदायिक पहल की है। उन्होंने मिलकर लगभग 80 आवारा पशुओं को एक गौशाला में पहुँचाने का काम किया है।
इस विशेष अभियान के तहत 55 सांडों और 25 गायों को जवाली के पास हार गाँव में स्थित एक गौशाला में पहुँचाया गया। यह गौशाला सरकार द्वारा बनाई गई है और इसे 'श्री मणिमहेश सेवा समिति' नामक एक NGO द्वारा चलाया जा रहा है। यह पूरा काम SDM और पशुपालन विभाग की अनुमति से किया गया, जिसमें स्थानीय निवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों और पशु चिकित्सा टीम ने सक्रिय रूप से भाग लिया। डॉ. साहिल चौधरी के नेतृत्व में पशु चिकित्सा टीम ने जानवरों को पकड़ने, उनकी टैगिंग करने और उनकी नसबंदी (स्टेरलाइजेशन) करने में मदद की। गौशाला भेजने से पहले कुछ जानवरों का इलाज भी किया गया।
इस पहल से उन किसानों को बड़ी राहत मिली है, जो अपनी फसलों को आवारा पशुओं से बचाने की समस्या से जूझ रहे थे। खड़ी फसलों को बार-बार नुकसान पहुँचने के कारण कई किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया था, जिससे इस इलाके में कृषि पर निर्भर लोगों की आजीविका को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। कुछ किसानों ने तो आवारा पशुओं के आतंक के कारण खेती करना ही बंद कर दिया और अपने खेत छोड़ दिए हैं।
फसलों को नुकसान पहुँचाने के अलावा, आवारा पशु सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गए हैं। सड़कों पर अचानक इनका आ जाना या व्यस्त रास्तों पर इनका मौजूद होना, वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पर मजबूर कर सकता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने यह भी शिकायत की है कि ये जानवर राहगीरों पर हमला भी कर देते हैं।
मनेई पंचायत के प्रधान दर्शन धीमान और भरुपलाहाड पंचायत के उप-प्रधान अमन चौधरी ने पशु चिकित्सा टीम, स्थानीय निवासियों और 'श्री मणिमहेश सेवा समिति' को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस संयुक्त प्रयास से पता चलता है कि कैसे जमीनी स्तर की संस्थाएं आपसी तालमेल से किसी पुरानी सार्वजनिक समस्या का समाधान कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि सामुदायिक भागीदारी से चलाए गए इस अभियान के बाद, दोनों पंचायतें अब आवारा पशुओं से मुक्त हो गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि पंचायतें स्थानीय युवाओं की एक टीम बनाएंगी, जो इलाके की निगरानी करेगी और आवारा पशुओं को फिर से आने से रोकेगी। उन वाहनों पर भी नज़र रखी जाएगी, जिनके ज़रिए जानवरों को कहीं और छोड़ने के लिए ले जाने का संदेह हो—खासकर रात के समय। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग अपने पालतू जानवरों को लावारिस छोड़ते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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