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कांगड़ा में PMAY के 900 से ज्यादा लाभार्थी दूसरी किश्त के इंतजार में

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घर बनाने के लिए स्वीकृत आर्थिक सहायता की दूसरी किश्त का इंतजार कर रहे 900 से अधिक गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ती जा रही है। गरीबी रेखा से नीचे (BPL), अंत्योदय और एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) जैसी श्रेणियों से जुड़े इन परिवारों का कहना है कि उन्हें योजना के तहत पहली किश्त तो मिल गई, लेकिन उसके बाद अगली राशि जारी नहीं होने के कारण वे अपने घरों का निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
लाभार्थियों के मुताबिक, कई परिवार एक साल से अधिक समय से दूसरी किश्त की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे अपने स्तर पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। नतीजतन कई परिवारों के मकान अधूरे पड़े हैं और उन्हें अस्थायी या वैकल्पिक व्यवस्था में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पहली किश्त मिलने के बाद गिराए पुराने मकान
लाभार्थियों ने बताया कि योजना के तहत पहली किश्त मिलने के बाद उन्हें सरकारी निर्देशों के अनुसार अपने पुराने और जर्जर मकानों को गिराकर नए घर का निर्माण शुरू करने के लिए कहा गया था। परिवारों ने इसी भरोसे पर पुराने घरों को तोड़ दिया और निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
लेकिन पहली किश्त खर्च होने के बाद दूसरी किश्त जारी नहीं हुई। इससे निर्माण कार्य रुक गया। कई परिवारों के पास न तो निर्माण सामग्री खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा है और न ही मजदूरी का खर्च उठाने की क्षमता।
लाभार्थियों का कहना है कि अगर उन्हें पहले से पता होता कि अगली किश्त मिलने में इतना लंबा समय लगेगा तो वे पुराने घरों को गिराने का फैसला नहीं करते। अब उनके सामने अधूरे मकान और सीमित आर्थिक संसाधनों की समस्या खड़ी हो गई है।
बारिश और मौसम ने बढ़ाई परेशानी
कांगड़ा में मौसम में बदलाव और बारिश के दौरान अधूरे मकानों में रहना इन परिवारों के लिए और मुश्किल हो जाता है। जिन घरों की दीवारें या छत का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, वहां परिवारों को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
कुछ लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने घर बनाने के लिए अपनी सीमित बचत भी खर्च कर दी है। कई परिवारों ने निर्माण सामग्री उधार लेकर काम शुरू किया था, लेकिन भुगतान के लिए दूसरी किश्त नहीं मिलने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
एक साल से ज्यादा समय से इंतजार
लाभार्थियों के मुताबिक, दूसरी किश्त के लिए उनका इंतजार कई मामलों में एक साल से अधिक हो चुका है। उनका कहना है कि योजना के तहत घर बनाने का उद्देश्य गरीब परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन राशि समय पर नहीं मिलने के कारण यही योजना उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है।
लाभार्थियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से जल्द से जल्द दूसरी किश्त जारी करने की मांग की है, ताकि अधूरे मकानों का निर्माण पूरा किया जा सके। उनका कहना है कि आर्थिक सहायता में देरी का सीधा असर उनके परिवारों की सुरक्षा और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।
गरीब परिवारों के सामने दोहरी चुनौती
PMAY का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने में मदद करना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे घर का निर्माण पूरा कर सकें।
लेकिन कांगड़ा में दूसरी किश्त में देरी ने लाभार्थियों के सामने दोहरी चुनौती पैदा कर दी है। एक तरफ पुराने मकान गिराने के बाद उनके पास रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहीं दूसरी ओर नए घर का निर्माण अधूरा है।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई परिवार मजदूरी और छोटे स्तर के काम पर निर्भर हैं। ऐसे में उनके लिए अपने संसाधनों से मकान का निर्माण पूरा करना बेहद कठिन है।
निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत भी समस्या
लाभार्थियों के लिए दूसरी किश्त में देरी का एक और असर निर्माण लागत पर पड़ रहा है। समय बीतने के साथ सीमेंट, सरिया, ईंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में बदलाव होता रहता है। मजदूरी की लागत भी बढ़ सकती है।
ऐसे में यदि लाभार्थियों को सहायता राशि समय पर नहीं मिलती है तो पहले से स्वीकृत राशि में मकान का निर्माण पूरा करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। कुछ परिवारों को अतिरिक्त पैसा उधार लेना पड़ सकता है, जिससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ने की आशंका है।
प्रशासन से जल्द भुगतान की मांग
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने और दूसरी किश्त जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपने पुराने मकान गिराए और निर्माण शुरू किया था। अब सहायता राशि में देरी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
लाभार्थियों की मांग है कि लंबित मामलों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र परिवारों को उनके निर्माण की स्थिति के अनुसार अगली किश्त जल्द उपलब्ध हो।
अधूरे मकानों की संख्या बढ़ने का खतरा
यदि दूसरी किश्त जारी करने में और देरी होती है तो अधूरे मकानों की संख्या बढ़ सकती है। इससे न केवल सरकारी आवास योजना के उद्देश्य पर असर पड़ेगा, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की परेशानी भी लंबी हो जाएगी।
लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं है, बल्कि योजना के तहत स्वीकृत सहायता की अगली किश्त समय पर चाहिए, ताकि वे अपने घरों का निर्माण पूरा कर सकें।
कांगड़ा जिले में 900 से अधिक BPL, अंत्योदय और IRDP परिवारों का दूसरी किश्त का इंतजार इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि सरकारी आवास योजनाओं में सिर्फ लाभार्थियों का चयन और पहली किश्त जारी करना ही पर्याप्त नहीं है। निर्माण की पूरी प्रक्रिया के दौरान समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
अब इन परिवारों की उम्मीद प्रशासन की ओर से जल्द कार्रवाई पर टिकी है। दूसरी किश्त जारी होने के बाद ही कई परिवार अपने अधूरे मकानों का निर्माण दोबारा शुरू कर सकेंगे और लंबे समय से चली आ रही आवास की समस्या से राहत पा सकेंगे।





