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शिमला। हिमाचल प्रदेश संयुक्त आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मानसून विधानसभा सत्र से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर सरकार ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 25 अगस्त को प्रदेशभर के हजारों आउटसोर्स कर्मचारी शिमला में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
शनिवार को शिमला में आयोजित संघ की बैठक में प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता संघ के संयोजक अश्वनी शर्मा और सह-संयोजक सोहन लाल तुलिया ने की। बैठक में कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति, लंबे समय से लंबित मांगों और सरकार के स्तर पर अब तक हुई कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई।
मांगों पर सकारात्मक निर्णय की मांग
संघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उनकी सेवा से जुड़ी कई समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार से लगातार संवाद किया गया है। इसके बावजूद कई मुद्दे अब भी लंबित हैं। संघ ने सरकार से मानसून विधानसभा सत्र से पहले इन मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
25 अगस्त को शिमला में जुटने की तैयारी
संघ ने निर्णय लिया है कि यदि सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं होती है तो 25 अगस्त को प्रदेशभर से आउटसोर्स कर्मचारी शिमला पहुंचेंगे। संघ का दावा है कि इस आंदोलन में हजारों कर्मचारी भाग लेंगे।
बैठक में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा। इसके बाद आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने पर सहमति बनी। कर्मचारी संगठनों ने अपने सदस्यों से अधिक से अधिक संख्या में शिमला पहुंचने की तैयारी करने का आह्वान किया है।
विभागों में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारी
प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। इनमें अलग-अलग विभागों और संस्थानों में विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियां संभालने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आउटसोर्स व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को सेवा की स्थिरता और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है। इसी वजह से कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवा शर्तों को लेकर सरकार के समक्ष मांगें रखते रहे हैं।
बैठक में आंदोलन की रणनीति पर मंथन
शनिवार की बैठक में केवल मांगों पर चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि आंदोलन की रणनीति को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। संघ के पदाधिकारियों ने विभिन्न विभागों में कार्यरत यूनियनों के प्रतिनिधियों से आंदोलन की तैयारियों की जानकारी ली।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आंदोलन को शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जाए। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यूनियन स्तर पर संपर्क अभियान चलाने पर भी चर्चा हुई।
सरकार से टकराव नहीं, समाधान की उम्मीद
संघ की ओर से सरकार को आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बावजूद कर्मचारी नेताओं ने मांगों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
संघ का कहना है कि कर्मचारी सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार मानसून विधानसभा सत्र से पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।
कर्मचारियों में बढ़ रही नाराजगी
बैठक में शामिल कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों के कारण आउटसोर्स कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने विभिन्न विभागों में अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा के साथ निभाई हैं, इसलिए सरकार को उनकी सेवा से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीरता दिखानी चाहिए।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
विधानसभा सत्र से पहले सरकार के सामने चुनौती
मानसून विधानसभा सत्र से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों का यह ऐलान सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए आंदोलन के व्यापक होने की संभावना है।
सरकार के सामने अब एक ओर कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन को लेकर बनने वाली स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी भी रहेगी।
आंदोलन की तैयारी तेज
संघ ने साफ कर दिया है कि 25 अगस्त की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जिला और विभागीय स्तर पर कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें आंदोलन की जानकारी दी जाएगी। कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों को अपने-अपने स्तर पर अधिक से अधिक कर्मचारियों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर है। यदि मानसून विधानसभा सत्र से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई ठोस फैसला होता है तो आंदोलन टल सकता है। लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में 25 अगस्त को शिमला में बड़ा कर्मचारी जमावड़ा होने की संभावना है।





