हिमाचल प्रदेश

Nurpur: स्कूल डाउनग्रेड होने से स्टूडेंट्स और अभिभावक नाराज़

Ratna Netam
25 April 2026 2:59 PM IST
Nurpur: स्कूल डाउनग्रेड होने से स्टूडेंट्स और अभिभावक नाराज़
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: नूरपुर के एक सरकारी लड़कों के स्कूल को हायर सेकेंडरी स्तर से डाउनग्रेड करने के निर्णय ने छात्रों और अभिभावकों में नाराज़गी पैदा कर दी है। स्कूल में उच्च शिक्षा उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद रखने वाले छात्रों और उनके माता-पिता ने प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्कूल लंबे समय से क्षेत्र के छात्रों के लिए हायर सेकेंडरी शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। कई छात्र और उनके परिवार इस स्कूल में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अचानक स्कूल को केवल सेकेंडरी स्तर तक सीमित करने का फैसला आने से छात्रों के भविष्य और करियर की योजनाओं पर असर पड़ा है।
छात्रों ने बताया कि हायर सेकेंडरी स्तर पर उपलब्ध विषय और शिक्षण सामग्री अब उन्हें नहीं मिलेगी। कई छात्रों का कहना है कि इस कदम से उन्हें पास के अन्य स्कूलों में दाखिला लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय, खर्च और मेहनत दोनों बढ़ेंगे।
अभिभावकों का कहना है कि यह फैसला छात्रों के शैक्षिक विकास को बाधित करेगा। उन्होंने प्रशासन से स्कूल को फिर से हायर सेकेंडरी स्तर पर बहाल करने की मांग की है। अभिभावकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन करने और उच्च अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाने को मजबूर होंगे।
स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि यह निर्णय शिक्षा विभाग की ओर से लिया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने संसाधनों और छात्रों की संख्या के आधार पर यह कदम उठाया है। हालांकि, प्रधानाध्यापक ने यह भी स्वीकार किया कि इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ा है।
स्थानीय विधायक और शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि छात्रों के हित को देखते हुए इस निर्णय की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि नूरपुर क्षेत्र के लिए हायर सेकेंडरी शिक्षा की उपलब्धता आवश्यक है और इससे कई विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और छोटे शहरों में उच्च शिक्षा तक पहुँच सीमित करने से छात्रों की शैक्षिक और मानसिक विकास प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय स्थानीय परिस्थितियों और छात्रों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
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