हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में लॉटरी पर नीरज भारती ने जताई आपत्ति, सरकार से पुनर्विचार की मांग

Kavita2
24 Aug 2026 4:08 PM IST
हिमाचल में लॉटरी पर नीरज भारती ने जताई आपत्ति, सरकार से पुनर्विचार की मांग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने की सरकार की कवायद को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र और पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सहित पूरी मंत्रिपरिषद को पत्र लिखकर लॉटरी शुरू करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

नीरज भारती ने अपने पत्र में प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था बहाल किए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही चिट्टे और अन्य नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में लॉटरी जैसी व्यवस्था शुरू करने से समाज में इसके संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

27 साल बाद लॉटरी शुरू करने की तैयारी

राज्य में लगभग 27 वर्षों के बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की कवायद चल रही है। सरकार की ओर से इसे राजस्व जुटाने के संभावित माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं।

पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने सरकार से आग्रह किया है कि लॉटरी शुरू करने से पहले इसके सामाजिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया जाए। उन्होंने अपने पत्र में विशेष रूप से प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या का उल्लेख करते हुए सरकार को इस दिशा में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

नशे के संकट के बीच जताई चिंता

नीरज भारती ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय चिट्टे समेत नशे की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर समाज और परिवार पहले से चिंतित हैं।

ऐसे वातावरण में लॉटरी की उपलब्धता बढ़ने से लोगों के बीच जुए या आसान तरीके से पैसा कमाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके संभावित सामाजिक परिणामों पर विचार करना चाहिए।

उनकी चिंता खासतौर पर युवाओं को लेकर है। नीरज भारती का मानना है कि सरकार की प्राथमिकता युवाओं को रोजगार, शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की होनी चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की जिनसे आर्थिक या सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

राजस्व और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन जरूरी

लॉटरी व्यवस्था को लेकर सरकार के सामने एक तरफ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक प्रभावों को लेकर चिंता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नीरज भारती ने सरकार से दोबारा विचार करने की मांग की है।

उनका कहना है कि सरकारी राजस्व बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए ऐसे विकल्प तलाशे जाने चाहिए जिनका समाज पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए पर्यटन, उद्योग, कृषि, बागवानी और अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने जैसे विकल्पों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

ऑनलाइन लॉटरी को लेकर अधिक चिंता

प्रस्तावित व्यवस्था में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की लॉटरी शामिल होने की बात सामने आई है। ऑनलाइन माध्यम उपलब्ध होने के कारण इसकी पहुंच व्यापक हो सकती है। मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से लोग आसानी से ऐसी गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।

यही वजह है कि ऑनलाइन लॉटरी के सामाजिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति लगातार पैसा लगाने की आदत विकसित कर लेता है तो इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।

नीरज भारती ने सरकार को लिखे पत्र में इस पहलू पर भी गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

सरकार से फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह

पूर्व सीपीएस ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और पूरी मंत्रिपरिषद से आग्रह किया है कि लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाए। उन्होंने इसे केवल राजस्व बढ़ाने के नजरिए से नहीं बल्कि सामाजिक प्रभावों को ध्यान में रखकर देखने की जरूरत बताई है।

उनका कहना है कि प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं और सरकार तथा प्रशासन युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में लॉटरी जैसी व्यवस्था शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इससे नशे और अन्य सामाजिक समस्याओं से निपटने के प्रयास प्रभावित न हों।

युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव पर जोर

हिमाचल प्रदेश में युवा आबादी की बड़ी हिस्सेदारी है और रोजगार तथा नशे जैसे मुद्दे पहले से चर्चा में हैं। ऐसे में लॉटरी की व्यवस्था को लेकर युवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी विचार की आवश्यकता है।

नीरज भारती की ओर से सरकार से की गई अपील इसी व्यापक चिंता से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार को नीति लागू करने से पहले विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की राय लेने की दिशा में भी विचार करने का आग्रह किया है।

फैसले पर टिकी नजर

फिलहाल सरकार की ओर से लॉटरी व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय और उस पर पुनर्विचार के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, नीरज भारती के पत्र के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

लॉटरी को लेकर सरकार की कवायद जहां राजस्व बढ़ाने की संभावनाओं से जुड़ी है, वहीं इसका सामाजिक प्रभाव एक महत्वपूर्ण सवाल बन गया है। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में चिट्टे और नशे के खिलाफ अभियान चल रहा है, इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसके संभावित परिणामों पर विचार करने की मांग तेज हो गई है।

अब देखना होगा कि सरकार पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती की आपत्ति और पुनर्विचार की मांग को किस तरह लेती है। यदि सरकार इस मुद्दे पर व्यापक समीक्षा करती है तो लॉटरी व्यवस्था लागू करने से पहले उसके सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है।

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