हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में 30 हजार से ज्यादा पशु हो चुके हैं लंपी वायरस से संक्रमित, हर दिन सौ पशुओं की मौत

Renuka Sahu
28 Aug 2022 2:25 AM GMT
More than 30 thousand animals have been infected with lumpi virus in Himachal, every day hundred animals die
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फाइल फोटो 

हिमाचल प्रदेश में लंपी वायरस का संक्रमण बेकाबू हो गया है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हिमाचल प्रदेश में लंपी वायरस का संक्रमण बेकाबू हो गया है। सरकार व विभाग के तमाम दावों व इंतजामों के बाद भी लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा हैं। लंपी वायरस से हर दिन 100 से ज्यादा पशुओं की मौत हो रही है। वहीं हर दिन हजारों पशु लंपी वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। पशुपालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में लंपी वायरस से अब तक कुल 754 पशु लंपी वायरस से संक्रमित होने के कारण जान गवां चुके हैं। वहीं 26901 पशु लंपी स्किन डिजीज से संक्रमित हो चुके हैं। लंपी वायरस का संक्रमण प्रदेश के नौ जिलों में फैल चुका हैं। इन जिलों में शिमला, कांगड़ा, सिरमौर, ऊना, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और चंबा जिला है। पशुपालन विभाग की ओर से प्रदेश में अभी तक कुल 59094 पशुओं को लंपी वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई गई है।

हालांकि प्रदेश सरकार ने प्रदेश स्तर पर एक अन्य जिलों में एक-एक नोडल अफसर तैनात किया है, जो लंपी त्वचा रोग पर बराबर निगरानी रखे हैं। सभी जिलों में 334350 वैक्सीन की आवश्यकता है जबकि विभाग के पास केवल 96293 वैक्सीन ही उपलब्ध हैं। विभाग के निदेशक डा. प्रदीप शर्मा ने कहा कि लंपी त्वचा रोग से कमजोर पशु ज्यादा मर रहे हैं। जहां यह वायरस फैला है, वहां पांच किलोमीटर के दायरे में पशुओं को वैक्सीन लगाई जा रही है। प्रदेश से लंपी त्वचा रोग की जांच के लिए राज्य के विभिन्न जिलों से एक अगस्त को भोपाल लैब में भेजे खून के नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी नहीं पहुंची है। एक ही लैब पर हिमाचल सहित देश के अन्य राज्य भी नमूनों की जांच के लिए पूरी तरह से निर्भर हैं। स्टेट नोडल अधिकारी डा. अरुण का कहना है कि पूरे उत्तर भारत में यह रोग फैला हुआ है। देश में केवल दो कंपनियां इस रोग की वैक्सीन बनाती हैं। इसके चलते वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है, लेकिन विभाग की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है।
ये होते हैं लक्षण
लंपी बीमारी गोवंश को प्रभावित करती है। देशी गोवंश की तुलना में संकर नस्ल की गउओं में इस रोग के फैलने की संभावना अधिक रहती है। लंपी होने पर पशु को बुखार होता है। शरीर में कई स्थानों पर गांठ पड़ जाते हैं। बाद में गांठ पक कर फोड़ा का रूप ले लेते हैं। इसके फैलने का मुख्य कारण मच्छर, मक्खी व किलनी है। यह रोग गंदगी की वजह से भी पशुओं में होता है। बीमारी का प्रसार संक्रमित पशु के नाक से स्राव, दूषित आहार और पानी से भी होता है।
इतने पशु शिकार
तिथि कुल मौतें संक्रमित
27 अगस्त 754 30210
26 अगस्त 624 26901
25 अगस्त 513 24399
24 अगस्त 422 21496
23 अगस्त 359 18541
22 अगस्त 290 14491
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