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हिमाचल में मानसून का प्रकोप बढ़ा, छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; 153 सड़कें बंद

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून का असर लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है, जबकि मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में भारी से मूसलधार बारिश की चेतावनी जारी की है। बारिश के साथ अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन और मौसम विभाग ने पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को नदी-नालों से दूर रहने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार रविवार को कांगड़ा, सिरमौर, मंडी, चंबा, कुल्लू और ऊना जिलों में रुक-रुककर वर्षा होने का क्रम जारी रहेगा। मौसम में बदलाव के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
10 और 11 अगस्त को भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने 10 अगस्त को कांगड़ा, सिरमौर, कुल्लू और मंडी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इन क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है।
वहीं 11 अगस्त को चंबा, मंडी, सिरमौर और कुल्लू जिलों में भी मूसलधार बारिश की संभावना है। इन जिलों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां करने पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और कई स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मौसम विभाग और प्रशासन ने पर्यटकों को नदी-नालों, खड्डों और जलस्रोतों के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी है।
भारी बारिश के दौरान नदी और नालों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। सामान्य दिनों में शांत दिखने वाले जलस्रोत भी कुछ ही समय में खतरनाक रूप ले सकते हैं। इसलिए लोगों को किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने और मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से जमीन के खिसकने का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश के दौरान चट्टानों और मलबे के सड़क पर गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रुकना या वहां से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ऐसे स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से उन सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, जहां पहले भी भूस्खलन हो चुका है।
153 सड़कें मलबे के कारण बंद
भारी बारिश और भूस्खलन का असर प्रदेश के सड़क नेटवर्क पर भी पड़ा है। प्रदेशभर में 153 सड़कें भूस्खलन और मलबा आने के कारण पूरी तरह से ठप बताई गई हैं। कई स्थानों पर सड़क पर मलबा और पत्थर गिरने से यातायात बाधित हुआ है।
सड़कों के बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही और लोगों के दैनिक आवागमन पर असर पड़ता है।
बारिश के बीच बंद सड़कों को खोलना भी चुनौतीपूर्ण होता है। लगातार वर्षा होने पर सफाई के बाद दोबारा मलबा आने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में संबंधित विभागों को मौसम में सुधार का इंतजार भी करना पड़ सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ी चुनौती
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां मानसून के दौरान चुनौती को और बढ़ा देती हैं। पहाड़ों में लगातार बारिश होने पर ऊपरी क्षेत्रों से पानी तेजी से नीचे आता है, जिससे नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। वहीं कमजोर पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन की आशंका भी बनी रहती है।
कांगड़ा, सिरमौर, मंडी, चंबा और कुल्लू जैसे जिलों में भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ऊना में भी रविवार को बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
प्रशासन और विभागों के सामने राहत की चुनौती
लगातार बारिश के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। बंद सड़कों को खोलने के लिए मशीनरी और कर्मचारियों को तैनात करना पड़ता है। वहीं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना भी जरूरी है।
बारिश के कारण यदि किसी क्षेत्र में अचानक बाढ़ या भूस्खलन की स्थिति बनती है तो राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय करना होगा। स्थानीय स्तर पर भी लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
मानसून अभी और दिखा सकता है असर
मौसम विज्ञान केंद्र की चेतावनी से साफ है कि हिमाचल में मानसून का प्रभाव अभी कम नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कुछ जिलों में भारी से मूसलधार बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सड़कें बंद होने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा भी बना रहेगा।
मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के आसपास न जाएं। पर्यटकों को भी स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने को कहा गया है।
प्रदेश में पहले से 153 सड़कें भूस्खलन और मलबे के कारण बंद हैं। ऐसे में नई बारिश के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन की कोशिश होगी कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क जल्द बहाल किया जाए और लोगों को सुरक्षित रखा जाए। फिलहाल हिमाचल में मानसून के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।





