हिमाचल प्रदेश

शिमला के ढली बाईपास पर भारी भूस्खलन, मलबा गिरते ही भागकर लोगों ने बचाई जान

Kavita2
7 Oct 2026 4:31 PM IST
शिमला के ढली बाईपास पर भारी भूस्खलन, मलबा गिरते ही भागकर लोगों ने बचाई जान
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बुधवार दोपहर ढली बाईपास पर अचानक भारी भूस्खलन हो गया। पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरकने के बाद भारी मात्रा में मिट्टी, मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे। घटना के समय सड़क के दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग और वाहन मौजूद थे। पहाड़ी से मलबा तेजी से नीचे आता देखकर लोग वहां से भागे और सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भूस्खलन अचानक हुआ। पहाड़ी के हिस्से से पहले छोटे पत्थर और मिट्टी गिरनी शुरू हुई और इसके बाद देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा सड़क पर फैल गया। आसपास मौजूद लोगों को जैसे ही खतरे का अंदेशा हुआ, वे सड़क से दूर हटने लगे।

घटना के समय सड़क पर एक वाहन भी गुजर रहा था। मलबा गिरने के बावजूद वाहन इसकी चपेट में आने से बच गया और सुरक्षित निकल गया। यदि मलबा कुछ सेकंड पहले या सीधे वाहन के ऊपर गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

ढली बाईपास शिमला के व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में स्थानीय वाहन और बाहरी क्षेत्रों की ओर जाने वाला यातायात गुजरता है। ऐसे में दिन के समय अचानक हुए भूस्खलन से वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई।

मलबा सड़क पर आने के बाद यातायात भी प्रभावित हुआ। सड़क के एक हिस्से पर मिट्टी और पत्थरों का ढेर जमा हो गया, जिसके कारण वाहनों की आवाजाही में बाधा आई। संबंधित विभाग की टीमों को इसकी सूचना दी गई और मार्ग को सुरक्षित बनाने तथा मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

भूस्खलन के बाद पहाड़ी के आसपास के हिस्से को भी संवेदनशील माना जा रहा है। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ढलान से और मलबा नीचे न आए। जब तक पहाड़ी की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती, तब तक वहां यातायात नियंत्रित रखना जरूरी होगा।

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाएं लगातार चिंता का कारण रही हैं। हाल के दिनों में शिमला जिले के अलग-अलग हिस्सों में पहाड़ियां दरकने और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। 28 सितंबर को शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में भी भारी बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हुआ था, जिससे सुंदरू खड्ड का प्रवाह प्रभावित हुआ था।

ढली-संजौली बाईपास पर भी इससे पहले जून में भारी भूस्खलन हो चुका है। उस दौरान सड़क पर बड़ी मात्रा में मलबा और पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह रुक गया था और मार्ग को दोनों तरफ से बंद करना पड़ा था।

बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण इस मार्ग पर पहाड़ी ढलानों की स्थिरता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत है। ढली क्षेत्र में सड़क के एक तरफ ऊंची पहाड़ियां हैं, जबकि दूसरी तरफ वाहनों और लोगों की लगातार आवाजाही रहती है।

बुधवार की घटना में सबसे राहत की बात यह रही कि पहाड़ी के नीचे मौजूद लोग समय रहते खतरे को समझ गए। मलबा गिरता देखकर लोग तुरंत भागे और सड़क से दूर चले गए।

घटना का दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। मलबा गिरने के बाद लोगों ने अन्य वाहनों को भी आगे जाने से रोकने की कोशिश की ताकि कोई वाहन प्रभावित क्षेत्र में न पहुंच जाए।

पुलिस और प्रशासन के लिए ऐसी घटनाओं के बाद सड़क को जल्द खोलने के साथ सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती रहती है। जल्दबाजी में मलबा हटाकर यातायात शुरू करने से उस स्थिति में खतरा बढ़ सकता है, जब पहाड़ी का बाकी हिस्सा भी कमजोर हो।

ऐसे में पहले ढलान की स्थिति का आकलन करना और उसके बाद ही यातायात बहाल करना जरूरी होता है। बड़े पत्थरों को हटाने के लिए मशीनरी का उपयोग किया जा सकता है और सड़क पर जमा मिट्टी साफ करने के बाद मार्ग खोला जा सकता है।

ढली बाईपास शिमला शहर के यातायात के लिए अहम माना जाता है। यहां मार्ग बाधित होने पर आसपास के दूसरे रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन की कोशिश आमतौर पर यही रहती है कि मलबा हटाकर सड़क को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से खोला जाए।

पहाड़ी क्षेत्रों में बदलते मौसम के दौरान वाहन चालकों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जहां सड़क किनारे ताजा मलबा दिखाई दे या पहाड़ी से पत्थर गिरने के संकेत मिलें, वहां गति कम रखना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

भूस्खलन के बाद स्थानीय लोगों ने भी मार्ग पर सतर्कता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि संवेदनशील पहाड़ियों की नियमित जांच और जोखिम वाले हिस्सों में समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

फिलहाल बुधवार की घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी वाहन के क्षतिग्रस्त होने की सूचना नहीं है। सड़क से गुजर रहा वाहन भी सुरक्षित बच गया।

यह घटना इसलिए गंभीर मानी जा रही है क्योंकि मलबा गिरने के समय सड़क के पास काफी लोग मौजूद थे। यदि वे समय रहते नहीं हटते तो स्थिति अलग हो सकती थी।

ढली बाईपास पर भूस्खलन के बाद प्रशासनिक टीमें स्थिति की निगरानी कर रही हैं। सड़क से मलबा हटाने और पहाड़ी के खतरे वाले हिस्से की जांच के बाद यातायात को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

बुधवार की यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक होने वाले भूस्खलन के खतरे की याद दिलाती है। राहत की बात यही है कि भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आने के बावजूद किसी की जान नहीं गई और मौके पर मौजूद लोग समय रहते सुरक्षित निकल गए।

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