हिमाचल प्रदेश

Mandi: मंडी की रत्ती खड्ड में पर्यावरणीय संकट, मछलियों की सामूहिक मौत से हड़कंप

Admindelhi1
13 Jun 2026 11:04 AM IST
Mandi: मंडी की रत्ती खड्ड में पर्यावरणीय संकट, मछलियों की सामूहिक मौत से हड़कंप
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दूषित पानी ने उजाड़ी जलीय दुनिया, रत्ती खड्ड में जांच शुरू

मंडी: जिले के बल्ह क्षेत्र में सुकेती खड्ड की सहायक रत्ती खड्ड में शुक्रवार सुबह लोगों ने जो जलजीवों की मौत का मंजर देखा तो उनके रौंगटे खड़े हो गए। पूरी खड्ड में लाखों मछलियां मरी पाई गई। मछलियों के साथ पानी में पलने वाले सांप व अन्य जीव भी मृत पाए गए। यह सब देख हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में सरकारी महकमों के अधिकारी मौके पर नजर आने लगे। यह जल जीव संहार को देखने लोग उमड़ पड़े। रत्ती पुल के नीचे का दृश्य देखकर स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। देखते ही देखते आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मामले की सूचना पंचायत प्रतिनिधियों व संबंधित विभागों को दी गई

गौरतलब है कि बल्ह रत्ती थाना के साथ ही यह खड्ड बहती है और साथ में ही नेरचौक रत्ती का औद्योगिक क्षेत्र है। लोगों के अनुसार इसी औद्योगिक क्षेत्र से प्रदूषित जल निकासी होती है जो सीधे खड्ड में जहर घोलने का काम करती है। उद्योगों से निकलने वाला जहरीला रसायनयुक्त पानी ही इस जलीय जीव संहार का कारण है। इसे अत्याधिक गंभीरता से लेना होगा अन्यथा कभी जानी नुकसान भी हो सकता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खड्ड के किनारे और पानी में लाखों छोटी-छोटी मछलियां मृत पड़ी थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू फैलने लगी और पर्यावरणीय संकट की आशंका गहरा गई। ग्रामीणों का कहना है कि खड्ड के ऊपरी हिस्से का पानी पूरी तरह साफ दिखाई दे रहा है, जबकि औद्योगिक क्षेत्र के बाद वाले हिस्से में ही जलीय जीवों की मौत हुई है। इससे दूषित या रासायनिक पानी छोड़े जाने की आशंका जताई जा रही है। रत्ती क्षेत्र कृषि और पशुपालन पर आधारित है तथा ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों में इसी खड्ड के पानी का उपयोग करते हैं। यह खड्ड कुछ ही दूरी पर सुकेती खड्ड से मिल जाती है जो वहां से लगभग 15 किलोमीटर दूर मंडी में आकर ब्यास नदी से मिलती है वह इसके किनारे कई पेयजल की योजनाएं हैं व हजारों लोग इसके पानी का प्रयोग करते हैं। खड्ड के आसपास चरने वाले मवेशी भी इसी खड्ड से पानी पीते हैं। ऐसे में जहरीले पानी से मवेशियों और अन्य जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कारणों का पता नहीं लगाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्राम पंचायत रत्ती के उप प्रधान पुष्पराज (उर्फ पप्पू जट) ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही मौके का जायजा लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग,मत्स्य पालन विभाग और उद्योग विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों ने खड्ड के पानी के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर औद्योगिक क्षेत्र से आने वाले दूषित पानी की आशंका जताई जा रही है। शिकायतकर्ता कपिल ठाकुर तथा ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाए और यदि किसी उद्योग की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और खड्ड का प्राकृतिक संतुलन सुरक्षित रह सके।

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