हिमाचल प्रदेश

कालका-शिमला रेलमार्ग पर यात्रियों को बड़ा झटका, दिसंबर में भी 10 ट्रेनें रद्द

Kavita2
19 Oct 2026 1:27 PM IST
कालका-शिमला रेलमार्ग पर यात्रियों को बड़ा झटका, दिसंबर में भी 10 ट्रेनें रद्द
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कालका-शिमला हेरिटेज रेलमार्ग पर यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों की परेशानियां फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुए रेलवे ट्रैक और पुल की मरम्मत पूरी नहीं होने के कारण रेल सेवाएं लगातार प्रभावित हैं। नई जानकारी के अनुसार, रेलवे ने दिसंबर में भी पांच अप और पांच डाउन ट्रेनों का संचालन रद्द रखने का निर्णय लिया है। एक से तीन दिसंबर 2026 के बीच भी यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल कालका से शिमला के बीच सीधी नियमित रेल सेवा बाधित है और धर्मपुर से शिमला के बीच सीमित ट्रेन संचालन किया जा रहा है।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त रेलमार्ग की मरम्मत और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामान्य परिचालन बहाल किया जाएगा। हालांकि, दिसंबर की रद्दीकरण अवधि के बारे में अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। उपलब्ध प्रकाशित रेलवे आदेश में 30 नवंबर तक दस ट्रेनें रद्द रहने की पुष्टि हुई है, जबकि दिसंबर की विस्तारित अवधि के लिए नया आधिकारिक आदेश अलग से सत्यापित होना बाकी है।

बरसात में क्षतिग्रस्त हुआ था रेलवे पुल

कालका-शिमला नैरोगेज रेलमार्ग पर 29 अगस्त 2026 को भारी बारिश के कारण टकसाल और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच पुल संख्या 57 के आसपास गंभीर क्षति हुई थी।

तेज बारिश और पानी के बहाव से रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई थी। इसके कारण रेलवे लाइन का एक हिस्सा असुरक्षित हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने तत्काल ट्रेनों का संचालन रोक दिया था।

इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू की गई, लेकिन लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कार्य प्रभावित होता रहा।

पांच अप और पांच डाउन ट्रेनें प्रभावित

रेलवे के पहले जारी आदेश के अनुसार, कालका से शिमला की ओर जाने वाली पांच सेवाएं रद्द की गई हैं। इनमें ट्रेन संख्या 52457, 52451, 52459, 52455 और अप मिक्स ट्रेन शामिल हैं।

इसी प्रकार शिमला से कालका की ओर आने वाली ट्रेन संख्या 52458, 52452, 52460, 52456 और डाउन मिक्स ट्रेन का संचालन भी रद्द रखा गया है।

रेलवे ने अक्टूबर और नवंबर के लिए इन ट्रेनों के रद्दीकरण की अधिसूचना जारी की थी।

अब दिसंबर में भी रेल सेवाएं प्रभावित रहने की जानकारी सामने आने से यात्रियों की चिंता बढ़ गई है।

धर्मपुर से शिमला के बीच सीमित रेल सेवा

मुख्य रेलमार्ग का क्षतिग्रस्त हिस्सा सुरक्षित नहीं होने के कारण रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए धर्मपुर और शिमला के बीच सीमित परिचालन की व्यवस्था की है।

ट्रेन संख्या 52453 धर्मपुर से शिमला के बीच संचालित की जा रही है, जबकि कालका से धर्मपुर के बीच इसका संचालन बंद है।

इसी प्रकार ट्रेन संख्या 52454 शिमला से धर्मपुर तक चल रही है। धर्मपुर से कालका के बीच यह सेवा उपलब्ध नहीं है।

इस आंशिक व्यवस्था के कारण यात्रियों को पूरी रेल यात्रा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दिसंबर के पर्यटन सीजन पर पड़ेगा असर

हिमाचल प्रदेश में दिसंबर का महीना पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर बड़ी संख्या में पर्यटक शिमला पहुंचते हैं।

कालका-शिमला टॉय ट्रेन पर्यटकों के बीच विशेष लोकप्रिय है। पहाड़ों, सुरंगों, घाटियों और प्राकृतिक दृश्यों के बीच गुजरने वाली इस ट्रेन में सफर करना पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव होता है।

लेकिन रेल सेवाएं बाधित रहने के कारण दिसंबर में शिमला घूमने की योजना बना रहे यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना पड़ सकता है।

इससे यात्रा का खर्च और समय दोनों बढ़ सकते हैं।

सड़क मार्ग पर बढ़ सकता है दबाव

कालका-शिमला रेलमार्ग पर नियमित सेवाएं बंद रहने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों को सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कालका से शिमला के लिए बस, टैक्सी और निजी वाहनों का उपयोग किया जा रहा है।

पर्यटन सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव भी बढ़ सकता है।

विशेष रूप से सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान शिमला की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात अधिक रहता है।

ऐसे में रेल सेवा बहाल होने से सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।

मरम्मत कार्य में मौसम बना चुनौती

टकसाल और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक के नीचे मिट्टी बह जाने के बाद उसे दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए आधार संरचना को मजबूत करना आवश्यक है।

मरम्मत के दौरान क्रेट वॉल और अन्य निर्माण सामग्री लगाने का काम किया गया, लेकिन बाद की बारिश से कुछ हिस्सों में दोबारा नुकसान हुआ।

अब रेलवे की प्राथमिकता क्षतिग्रस्त हिस्से को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाना है, ताकि ट्रेन परिचालन के दौरान कोई खतरा न रहे।

विश्व धरोहर रेलमार्ग की विशेष पहचान

कालका-शिमला रेलवे लाइन देश के प्रमुख ऐतिहासिक रेलमार्गों में शामिल है।

लगभग 96 किलोमीटर लंबा यह नैरोगेज रेलमार्ग हरियाणा के कालका को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से जोड़ता है।

इसका निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था और वर्ष 1903 में इस पर रेल परिचालन शुरू हुआ था।

वर्ष 2008 में यूनेस्को ने इसे 'माउंटेन रेलवेज ऑफ इंडिया' के अंतर्गत विश्व धरोहर का दर्जा दिया था।

इस रेलमार्ग की सुरंगें, पुल और पहाड़ी मोड़ इसे पर्यटन की दृष्टि से विशेष बनाते हैं।

2023 में भी क्षतिग्रस्त हुआ था ट्रैक

कालका-शिमला रेलमार्ग पर प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहले भी परिचालन प्रभावित हो चुका है।

अगस्त 2023 में भारी बारिश और भूस्खलन के चलते शिमला के समरहिल क्षेत्र में रेलवे ट्रैक को गंभीर नुकसान हुआ था।

उस समय भी रेल सेवाएं लंबे समय तक बाधित रही थीं।

इस वर्ष अगस्त में एक बार फिर भारी बारिश के कारण ट्रैक का महत्वपूर्ण हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है।

बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं पहाड़ी रेलवे संरचनाओं की सुरक्षा और रखरखाव की चुनौतियों को सामने लाती हैं।

यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह

रेल सेवाएं प्रभावित होने के कारण यात्रियों को यात्रा की योजना बनाते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

जिन यात्रियों ने दिसंबर में कालका-शिमला टॉय ट्रेन की यात्रा की योजना बनाई है, उन्हें रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से ट्रेन की उपलब्धता और रद्दीकरण की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।

भारतीय रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा और अधिकृत टिकट बुकिंग माध्यमों पर ट्रेनों की ताजा स्थिति की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

रेल सेवा बहाल होने का इंतजार

कालका-शिमला हेरिटेज रेलमार्ग पर अगस्त के अंत से प्रभावित सेवाओं ने यात्रियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

धर्मपुर से शिमला तक सीमित परिचालन होने के कारण कालका से सीधी रेल यात्रा का विकल्प फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

रेलवे प्रशासन की प्राथमिकता पुल संख्या 57 के आसपास क्षतिग्रस्त ट्रैक की सुरक्षित मरम्मत करना है।

जब तक सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी नहीं हो जातीं, तब तक सामान्य रेल सेवा की बहाली की निश्चित तारीख बताना संभव नहीं है।

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