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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। शिमला पुलिस ने नशे के कारोबार से अर्जित की गई लाखों रुपये की अवैध संपत्ति पर बड़ा शिकंजा कसा है। पुलिस ने एक नशा तस्करी मामले में करीब 17 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की है, जिसमें एक लग्जरी कार और नकदी शामिल है। यह कार्रवाई रोहड़ू थाना क्षेत्र में दर्ज 83 ग्राम हेरोइन बरामदगी मामले की वित्तीय जांच के आधार पर की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क को भी खत्म करने के लिए उनकी अवैध कमाई और संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की जा रही है। इसी अभियान के तहत शिमला पुलिस ने यह महत्वपूर्ण कार्रवाई की है।
मामला रोहड़ू थाना क्षेत्र का है, जहां दो फरवरी को महेंदली पुल के पास पुलिस ने पंजाब निवासी जशनदीप सिंह और धर्मप्रीत सिंह को पकड़ा था। जांच के दौरान उनकी टैक्सी से 83 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। पुलिस ने मौके से वाहन को भी जब्त कर लिया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई और नशा तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के नेटवर्क और उनकी आर्थिक गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। वित्तीय अन्वेषण में सामने आया कि चिड़गांव निवासी शुभम दरकाल ने नशा तस्करी से अर्जित धन का इस्तेमाल कर एक लग्जरी वाहन खरीदा था। इसके अलावा मामले में बरामद नकदी भी अवैध नशे के कारोबार से जुड़ी आय पाई गई।
इसके बाद पुलिस ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम की धारा 68एफ के तहत कार्रवाई करते हुए करीब 17 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति को फ्रीज कर जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य नशा तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ना है, ताकि वे अवैध कारोबार से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल आगे न कर सकें।
शिमला पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक वित्तीय जांच के आधार पर सात अलग-अलग मामलों में 25 आरोपियों की कुल 4.29 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। पुलिस का दावा है कि इस साल हिमाचल प्रदेश में किसी भी जिला पुलिस द्वारा की गई यह सबसे बड़ी संपत्ति जब्ती की कार्रवाई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 और 2025 में जिले में इस तरह की कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन अब नशे के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है। पुलिस की रणनीति है कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके आर्थिक स्रोतों को भी खत्म किया जाए।
पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी से जुड़े लोग अक्सर अवैध कमाई से महंगी गाड़ियां, संपत्तियां और अन्य सामान खरीदते हैं। ऐसे मामलों में वित्तीय जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि कौन-कौन सी संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई हैं। इसके बाद कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई की जा रही है।
शिमला पुलिस ने साफ किया है कि आने वाले समय में भी नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस का लक्ष्य केवल तस्करों को पकड़ना नहीं बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क को कमजोर करना है। अवैध संपत्तियों की जब्ती से नशे के कारोबार से जुड़े लोगों में बड़ा संदेश जाएगा कि अपराध से कमाई गई संपत्ति को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।





