हिमाचल प्रदेश

हिमाचल को बड़ी सौगात जेपी नड्डा ने रखी रिसर्च सेंटर की नींव

Ratna Netam
12 Oct 2026 8:17 PM IST
हिमाचल को बड़ी सौगात जेपी नड्डा ने रखी रिसर्च सेंटर की नींव
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केलोंग। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को केलोंग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के प्रस्तावित 'हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर' का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और अधिक ऊंचाई पर तैनात कर्मियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड, मौसम में बदलाव और स्थानीय समुदायों की जीवनशैली जैसे कारक स्वास्थ्य पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं। इन परिस्थितियों का व्यवस्थित अध्ययन करके स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करना और उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक उपाय विकसित करना आवश्यक है।
केलोंग में मेडिकल रिसर्च सेंटर की आधारशिला
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के केलोंग में आईसीएमआर के हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखी।इस अवसर पर विधिवत भूमि पूजन भी किया गया।प्रस्तावित केंद्र का मुख्य उद्देश्य अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना है।केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि यह संस्थान भविष्य में ऊंचाई वाले इलाकों के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन करना जरूरी है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याओं पर होगा शोध
हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सामान्य मैदानी इलाकों की तुलना में अलग तरह की पर्यावरणीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।अधिक ऊंचाई पर वातावरण में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव कम हो जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध होने में कठिनाई हो सकती है।इसके अलावा अत्यधिक ठंड और मौसम में अचानक बदलाव भी स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं।प्रस्तावित अनुसंधान केंद्र में ऐसी परिस्थितियों से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि इन समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन करके स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की बेहतर पहचान की जा सकती है।
कम ऑक्सीजन के प्रभाव को समझने पर जोर
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन की उपलब्धता स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।ऐसी परिस्थितियों में कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, थकान और ऊंचाई से संबंधित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।इन प्रभावों की गंभीरता व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, ऊंचाई और वहां रहने की अवधि जैसे कारकों पर निर्भर कर सकती है।जेपी नड्डा ने कम ऑक्सीजन की परिस्थितियों में मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए समर्पित वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता बताई।इस तरह के अध्ययन से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य संबंधी उपाय विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अत्यधिक ठंड और बदलते मौसम की चुनौतियां
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में अत्यधिक ठंड और बदलते मौसम का भी उल्लेख किया।हिमालयी क्षेत्रों में तापमान और मौसम की परिस्थितियां स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को प्रभावित कर सकती हैं।विशेष रूप से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए स्थानीय वातावरण के अनुसार तैयार किए गए उपाय महत्वपूर्ण होते हैं।नड्डा ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से इन परिस्थितियों के प्रभावों को समझना जरूरी है।उन्होंने स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान और उचित उपाय विकसित करने के लिए व्यवस्थित अध्ययन पर जोर दिया।
आदिवासी समुदायों की जीवनशैली का भी होगा अध्ययन
प्रस्तावित अनुसंधान केंद्र की एक महत्वपूर्ण दिशा हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की जीवनशैली और स्वास्थ्य के बीच संबंधों को समझना होगी।केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि इन समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली और स्थानीय परिस्थितियों का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाना चाहिए।पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की दैनिक गतिविधियां, रहन-सहन और पर्यावरणीय परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हो सकती हैं।ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी शोध के दौरान स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।इन अध्ययनों से समुदायों की वास्तविक जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
ऊंचाई पर तैनात कर्मियों के लिए भी महत्वपूर्ण
जेपी नड्डा ने कहा कि यह केंद्र केवल हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात कर्मियों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने में भी सहायक होगा।अधिक ऊंचाई पर काम करने वाले लोगों को कठिन मौसम और कम ऑक्सीजन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।ऐसे क्षेत्रों में लंबे समय तक काम करने के स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जाता है।प्रस्तावित केंद्र से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी भविष्य में इन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों की स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी उपायों को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकती है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में केंद्र के किसी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम या कर्मियों के लिए नई चिकित्सा सुविधा की घोषणा नहीं की गई है।
निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की पहल
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के साथ उनकी रोकथाम पर ध्यान देना भी आवश्यक है।उन्होंने अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान करने और उपयुक्त उपाय विकसित करने की जरूरत बताई।निवारक स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य संभावित बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को पहले से समझकर उन्हें कम करने का प्रयास करना है।वैज्ञानिक अनुसंधान से प्राप्त जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करती हैं, स्थानीय जरूरतों के अनुसार उपाय तैयार करना उपयोगी हो सकता है।
वैज्ञानिक अनुसंधान को मिलेगा संस्थागत आधार
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित केंद्र ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए मजबूत संस्थागत आधार तैयार करेगा।इसका अर्थ है कि संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र से हिमालयी क्षेत्र की विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान और प्रभावी उपाय विकसित करना आवश्यक है।हालांकि, उपलब्ध मंत्रालयीय विवरण में केंद्र की निर्माण लागत, अनुसंधान परियोजनाओं की संख्या और निर्माण पूरा होने की निर्धारित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है।
हिमालयी क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार स्वास्थ्य अनुसंधान
हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अनुसंधान के लिए विशेष महत्व रखती हैं।यहां रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें स्थानीय जलवायु और जीवनशैली से प्रभावित हो सकती हैं।इसलिए ऐसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन करते समय स्थानीय परिस्थितियों को समझना जरूरी है।जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में इसी आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि कम ऑक्सीजन, ठंड और बदलते मौसम जैसी चुनौतियों का व्यवस्थित अध्ययन करके बेहतर स्वास्थ्य संबंधी उपाय विकसित किए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
केलोंग में आईसीएमआर के हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखे जाने को हिमालयी क्षेत्रों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर केंद्रित पहल के रूप में देखा जा रहा है।इस संस्थान का उद्देश्य अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और वहां तैनात कर्मियों के सामने आने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों पर वैज्ञानिक समझ विकसित करना है।केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान, उपयुक्त उपायों का विकास और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।आने वाले समय में केंद्र की अनुसंधान गतिविधियों और उनके निष्कर्षों से यह स्पष्ट होगा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में इसका कितना योगदान होता है।
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