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हिमाचल प्रदेश
ऊना में लंपी स्किन डिजीज का कहर जारी, 2 दिनों में 118 पशुओं की मौत
Rani Sahu
3 Sept 2022 7:45 PM IST

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ऊना : ऊना जिले में लंपी स्किन डिजीज से पशुओं की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को ऊना में 51 पशुओं की मौत हुई जबकि 244 नए केस सामने आए हैं। अब तक कुल 440 पशुओं की मौत हो चुकी है। जिले में लंपी स्किन डिजीज के अब तक कुल 7819 मामले सामने आए हैं जिसमें से 2612 पशु ठीक हो चुके हैं जबकि 4767 पशुओं का इलाज चल रहा है। पशुपालन विभाग द्वारा शुरू में ही लंपी स्किन डिजीज की बीमारी की चपेट में आए 11 पशुओं के सैम्पल भोपाल लैब में भेजे गए थे जो सभी पॉजिटिव पाए गए हैं। जिला ऊना में पिछले 2 दिनों में पशुओं की मौत के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। अकेले 2 दिनों में ही पशुओं की मौत के 118 मामले सामने आए हैं। एकाएक पशुओं की मौत के मामले बढऩे से पशुपालक भी परेशान हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारी, डाक्टर्स व अन्य कर्मचारी लगातार पशुओं में फैल रही इस बीमारी की रोकथाम के साथ-साथ उनका उपचार करने में लगे हुए हैं।
साढ़े 7 लाख रुपए का बजट जारी
जिला ऊना में लंपी स्किन डिजीज की बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग को साढ़े 7 लाख रुपए का बजट जारी हुआ है। इस बजट के मिलने से पशुपालन विभाग और भी बेहतर तरीके से पशुओं का उपचार करेगा। इस बजट के प्राप्त होने के बाद पशुपालन विभाग ने दवाइयों का और आर्डर कर दिया है। पशुपालन विभाग के मुताबिक हरोली व गगरेट विधानसभा क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज के पहले अधिक मामले आए थे। अब इन क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। इन क्षेत्रों में अब पशुओं का डैथ रेट कम हुआ है।
4 अगस्त को आया था पहला मामला
पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक प्रोजैक्ट व नोडल ऑफिसर डा. राजीव शुक्ला ने कहा कि 4 अगस्त को जिले में लंपी स्किन डिजीज का पहला केस पाया गया था। उस समय 11 पशुओं के सैम्पल भोपाल लैब में जांच के लिए भेजे गए थे जो सभी पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक पशुपालन विभाग द्वारा 17 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है। 4 जागरूकता कैंप और भी लगाए जाएंगे।
साफ-सफाई व फॉगिंग बारे किया जा रहा जागरूक
पशुपालन विभाग की रैपिड रिस्पाॅन्स टीम के इंचार्ज डाॅ. आरके भट्टी ने कहा कि उनकी टीम लगातार पशुओं का उपचार करने में जुटी है। उन्हें जैसे ही कहीं से पशुओं के बीमार होने की सूचना आती है तो वह तुरंत मौके पर पहुंचकर पशुओं का उपचार कर रहे हैं। इसके अलावा पशुओं को साफ-सफाई व फॉगिंग के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
सोर्स- punjab kesari
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